अतीश दीपंकर, ब्यूरो चीफ, पटना (बिहार), NIT:

बिहार के भागलपुर स्थित एसएम कॉलेज में “भारतीय संस्कृति में लोक कलाओं का बदलता स्वरूप” विषय पर दो-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. बिमलेन्दु शेखर झा ने दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भागलपुर प्रमंडल के आयुक्त अवनीश कुमार सिंह उपस्थित रहे।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. झा ने कहा कि भारतीय लोक कलाएं देश की समृद्ध परंपरा के साथ-साथ समाज का जीवंत दस्तावेज और हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। उन्होंने कहा कि समय के साथ इनका स्वरूप बदल रहा है और आज यह परंपरा एवं आधुनिकता के संगम पर खड़ी हैं।
उन्होंने एसएम कॉलेज में विजुअल आर्ट्स विभाग खोलने के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर प्रस्ताव भेजा जाए, विश्वविद्यालय हर संभव सहयोग देगा।
मुख्य अतिथि अवनीश कुमार सिंह ने कहा कि लोक कलाओं के संरक्षण के लिए उन्हें आम जनजीवन से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सेमिनार से निकले निष्कर्ष समाज के लिए उपयोगी साबित होंगे।
कॉलेज की प्राचार्या एवं सेमिनार की संयोजक प्रो. निशा झा ने विषय प्रवेश कराते हुए लोक कला और लोक संगीत के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य प्रभाव के कारण भारतीय कला एवं संगीत प्रभावित हो रहे हैं, ऐसे में इनके संरक्षण के लिए ठोस प्रयास जरूरी हैं।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का अंगवस्त्र देकर सम्मान किया गया। संगीत विभाग की छात्राओं ने कुलगीत और वेदगान प्रस्तुत किया, वहीं पुष्प वर्षा से अतिथियों का स्वागत किया गया।
सेमिनार में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से भाग लिया। पहले दिन के प्लेनरी सत्र में विभिन्न विद्वानों ने लोक कला, लोक संगीत और संस्कृति पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
दो दिनों तक चलने वाले इस सेमिनार में लोक गाथा, लोक गीत, वैश्वीकरण का प्रभाव, लोक साहित्य और लोक नाट्य जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी।
कार्यक्रम के अंतर्गत सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन किया गया, जिसमें छात्राओं ने आकर्षक प्रस्तुतियां दीं।
सेमिनार के सफल आयोजन में शिक्षकों, शोधार्थियों और आयोजन समिति के सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा।

