अबरार अहमद खान, स्टेट ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

कोरोना संकट एवं लॉक डाउन (कोरोना कर्फ्यू) की मार से कोई अछूता नहीं है सभी लोग आर्थिक तंगी से दो चार हो रहे हैं। मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड मसाजिद कमेटी औकाफ ए आम्मा के अधीन आने वाली मसाजिद के इमाम व मोअज़िन भी इस संकट की घड़ी में आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, कोई उनका पुरसान हाल नहीं है। ऐसे में
जमीअत उलमा मध्यप्रदेश की टीम ने रमज़ान के पवित्र माह में रमज़ान पैकेज एवं एक महा का अतिरिक्त वेतन देने की मांग की है। जमीअत उलमा मध्य प्रदेश के प्रेस सचिव हाजी इमरान का कहना है कि इस संकट की घड़ी में सभी लोग आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। 24 घंटे मस्जिदों में सेवा देने वाले इमाम मोअज़िन की ज़रूरतें भी हैं। कोरोना कर्फ्यू की वजह से रमज़ान के पवित्र महा में मस्जिदों में भी नमाज़ियों की तादाद भी नही है। और इस बार इमाम वगैरह तरावीह भी नही पढ़ा पाए। यह संकट पिछले वर्ष भी था इमाम व मोअज़िन का वेतन भी बहुत कम होता है। वह भी समय पर नही मिलता हाल ही में कई महीनों के पश्चात इमाम व मोअज़िन को वेतन प्राप्त हुआ है। पिछले लॉक डाउन में महीनों बिना वेतन के यह इमाम व मोअज़िन अपनी सेवाएं देते रहे और इस बार भी अपनी सेवाएं दे रहें है जिसकी ओर मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड को ध्यान देकर इमाम मोज़िन हज़रात को रमज़ान पैकेज देने पर विचार करना चाहिए. जमीअत उलमा मध्यप्रदेश ने वक़्फ़ बोर्ड के साथ साथ औकाफ अम्मा मुतवल्ली कमेटी से भी मांग की है कि भोपाल शहर की तमाम मस्जिदों के इमाम व मोअज़िन को रमज़ान पैकेज एवं एक महा का अतिरिक्त वेतन देकर उनके भार को कम करने की ओर क़दम बढ़ाना चाहिए ।हाजी इमरान ने कहा कि इमाम व मोअज़िन की कोई ऊपरी आमदनी नहीं होती है। कुछ इमाम रमज़ान मुबारक में तरावीह पढ़ाते हैं जो इस बार भी नहीं पढ़ा पाए और कुछ टीयूशन पढ़ाते हैं वो भी बंद है ऐसे में रमज़ान के पवित्र माह में इनकी ज़रूरत पर भी ध्यान देना समय की बड़ी जरूरत है जो इतने कम वेतन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
