महिलाओं के किचन का बजट गड़बड़ाया, सब्जियों के साथ-साथ दालों के दाम में भी हो रही है बढ़ोतरी | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

महिलाओं के किचन का बजट गड़बड़ाया, सब्जियों के साथ-साथ दालों के दाम में भी हो रही है बढ़ोतरी | New India Times

एक तरफ जहां सब्जियों के बढ़ते दामों ने बजट गड़बड़ा रखा है वहीं दूसरी तरफ दालों के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। महंगाई के चलते आम जनता परेशान हो रहा है और उसका बजट बिगड़ रहा है।

अरहर दाल हो उड़द दाल हो या मूंग दाल सभी के दाम आसमान छू रहे हैं। बढ़े दामों का खामियाजा जनता को ही भुगतना पड़ता है। किसान तो अपना माल बेचकर घर चला जाता है, लेकिन कुछ लोग बड़े व्यापारी अगर किसी भी माल को 1 दिन भी अपने गोदाम में दबाए रखते हैं और उसकी शॉर्टेज बताते हैं तो अगले दिन ही उसके भाव चढ़ने लगते हैं। बड़े व्यापारी, होलसेल और रिटेल सभी एक चेन के तहत एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

अगर दालों के दाम की बात की जाए तो बीते हफ्ते से 10 दिनों में दामों में ठीक-ठाक वृद्धि हुई है, भले ही वृद्धि 5 से 10 की हो, लेकिन आम जनता को इस महंगाई की मार से रूबरू होना पड़ रहा है।

दालों के भाव में उछाल जारी

महिलाओं के किचन का बजट गड़बड़ाया, सब्जियों के साथ-साथ दालों के दाम में भी हो रही है बढ़ोतरी | New India Times

एक खुदरा व्यापारी ने बातचीत में बताया कि इस समय अरहर का दाल 130 से 140 के बीच है।

ऐसे ही उड़द दाल 140 से 150 के बीच में मिल रही है। मूंग छिलका दाल और मूंग धुली दाल 100 से लेकर 120 के रेट में खुदरा मार्केट में बिक रही है। चना दाल 70 से 80, छोले 130 से 140 के दाम में मार्केट में मिल रहे हैं। ठीक इसी तरह राजमा दाल 130 से 140 के दाम में मार्केट में उपलब्ध है। लाल मसूर और काली मसूर दाल 80 से लेकर 100 तक मार्केट में मिल रही है।
इन सभी दालों के दाम में बीते 1 हफ्ते में 5 से 10 के बीच का इजाफा हुआ है।

एक दिन में करोड़ों का मुनाफा

यह इजाफा सुनने में भले ही बहुत ज्यादा ना लगे लेकिन यह अपने आप में बहुत बड़ा मुनाफा उन लोगों के लिए होता है जो 1 दिन भी ऐसी दालों को स्टॉक कर इनके भाव को बढ़ा देते हैं।
बढ़े हुए दामों से सबसे ज्यादा त्रस्त जनता ही होती है,
क्योंकि जब दुकान पर पहुंचती है तो उसे पता चलता है कि एक ही दिन में दाम 5 से 10 रूपये बढ़ गए।
इसका मुनाफा सबसे ज्यादा थोक व्यापारी कमाते हैं, क्योंकि किसान अपनी दालों की एक मुश्त कीमत देकर उन्हें बेचकर मंडी से चला जाता है और मंडी के बाद जब ये दालें बड़े-बड़े स्टॉकिस्ट के पास पहुंचती हैं, तब वे तय करते हैं कि किस दाल का दाम किस हिसाब से रखा जाएगा। स्टॉकिस्ट अगर चाहें तो किसी भी दाल के दाम में इजाफा कर 1 दिन में करोड़ों रुपये का मुनाफा कमा लेते हैं और सबसे ज्यादा नुकसान जनता को होता है। बढ़ते दामों को लेकर जनता परेशान है और रोजगार भी मंदा है।

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