अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

भोपाल की ऐतिहासिक धरोहरें प्रशासन की लापरवाही के चलते बदहाली का शिकार हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच के सचिव हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने भोपाल की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण एवं सुरक्षा की मांग उठाते हुए ऐतिहासिक बेनज़ीर महल और उसके परिसर के विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई है। उन्होंने मांग की है कि बेनज़री ग्राउंड को एक सुंदर पार्क के रूप में विकसित किया जाए तथा बेनज़ीर महल का संरक्षण कर उसे शहर की प्रमुख विरासत स्थलों में शामिल किया जाए।

हाजी इमरान हारून ने कहा कि भोपाल अपनी ऐतिहासिक विरासत और बेगमों द्वारा निर्मित भव्य इमारतों के लिए देश-दुनिया में पहचान रखता है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि शहर की अनेक ऐतिहासिक धरोहरें उपेक्षा और देखरेख के अभाव में जर्जर होती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि केवल कागज़ी योजनाओं और सौंदर्यीकरण अभियानों से विरासत नहीं बचाई जा सकती, बल्कि इनके संरक्षण के लिए ठोस और दीर्घकालिक प्रयासों की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि शहर में स्थित ताजमहल पैलेस, शौकत महल, यासीन महल, बारा महल, अनेक बावड़ियां और ऐतिहासिक दरवाज़े बदहाली का शिकार हैं। वहीं बेगमों के मकबरों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। विशेष रूप से शाजहां बेगम के मकबरे की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि कई ऐतिहासिक स्थल असामाजिक तत्वों, अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों का केंद्र बनते जा रहे हैं।

हाजी इमरान हारून ने कहा कि पुरातत्व और पर्यटन विभाग उन स्थलों पर अधिक बजट खर्च कर रहे हैं जहां पहले से आमदनी हो रही है, जबकि उपेक्षित धरोहरों के संरक्षण से न केवल शहर की सुंदरता बढ़ेगी बल्कि पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
उन्होंने कहा कि बेनज़ीर महल, जिसका निर्माण बेगम शासनकाल में मेहमानखाने के रूप में किया गया था, आज संरक्षण के अभाव में तेजी से बदहाल हो रहा है। ऐसे में गोलघर, मोती महल, सदर मंजिल और गोहर महल की तर्ज पर बेनज़ीर महल का भी संरक्षण और सौंदर्यीकरण किया जाना चाहिए।
हाजी इमरान हारून ने शासन, प्रशासन, पुरातत्व विभाग और पर्यटन विभाग से मांग की कि बेनज़ीर महल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा उसके विशाल मैदान को एक सुव्यवस्थित पार्क के रूप में विकसित कर आसपास के क्षेत्र को भी विरासत संरक्षण योजना में शामिल किया जाए, ताकि भोपाल की ऐतिहासिक पहचान आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।

