दो दिवसीय स्व-उन्नति साधना शिविर का हुआ शुभारम्भ | New India Times

गुलशन परूथी, ग्वालियर (मप्र), NIT:

दो दिवसीय स्व-उन्नति साधना शिविर का हुआ शुभारम्भ | New India Times

प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थानीय शाखा माधौगंज प्रभु उपहार भवन सेवाकेंद्र पर “दो दिवसीय स्व-उन्नति साधना शिविर” का शुभारम्भ हुआ. यह आयोजन आजादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर थीम के अंतर्गत किया गया. इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से बी.के. डॉ. मुकुल भाई (पुणे), लश्कर ग्वालियर की मुख्य इंचार्ज बी.के. आदर्श दीदीजी, बी.के. प्रहलाद भाई उपस्थित थे.
कार्यक्रम में बी. के. आदर्श दीदी जी ने सभी का स्वागत अभिनन्दन किया और स्व उन्नति साधना शिविर का उद्द्देश्य स्पष्ट किया और बताया कि स्व उन्नति अगर करनी है तो राजयोग की विधि को जानना और उसे प्रयोग में लाना अति आवश्यक है. आज हर व्यक्ति खुश रहना चाहता है पर अनेकानेक बातें उसके जीवन में ख़ुशी को कम कर देती है. इस दो दिवसीय शिविर में आप अपनी अध्यात्मिक रीति से स्व उन्नति कर सकते है और अपने आन्तरिक गुणों और शक्तियों का बढ़ा सकते हैं.

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तत्पश्चात बी.के. मुकुल भाई जी ने सभी को संबोधित करते हुए बताया कि मैडिटेशन को अगर हम अपनी दिनचर्या का एक हिस्सा बना लें तो आपको स्वयं ही उसके प्रयोग अपने जीवन में अनुभव होने लग जायेंगे. उन्होंने योग की विधि एवं प्रयोग के कुछ मुख्य पॉइंट्स पर प्रकाश डालते हुए समझाया –
1- पॉइंट ऑफ़ लाइट – आज बहुत आवश्यक है हर कर्म करते बीच – बीच में अपने मन, वाणी और संकल्पों को एकाग्र करना. बस एक उस ईश्वर की लगन में मगन रहने का अभ्यास करें. व्यर्थ संकल्प, व्यर्थ बोल से परे और अपने आप को पॉइंट ऑफ़ लाइट के समान अनुभव करने का अभ्यास करें और अपना कनेक्शन उस परमात्मा के साथ जोडें.
2- स्मृति का स्वरुप – हमें जो स्वमान या वरदान ईश्वर से प्राप्त हुए हैं उसको बार – बार स्मृति में लाओ और उसका अपनी दिनचर्या मे प्रयोग करो तो आपको स्वत: ही शांति का, ख़ुशी का अनुभव होने लग जायेगा क्योकि जब तक आप शांति की अनुभूति नहीं करेंगे तब तक दूसरो को भी वह अनुभूति नहीं कर वा सकते हैं.
3- संकल्प द्वारा सेवा – कहते हैं संकल्प की शक्ति सबसे बड़ी शक्ति होती है तो आज से हम सभी एक अभ्यास को अपनी दिनचर्या मे लायेंगे की जो भी व्यक्ति मेरे संपर्क मे आ रहा है मैं उन सभी के प्रति शुभ सोचूंगी, सकारात्मक चिंतन करुँगी तो आप देखेंगे की सामने वाला मनुष्य आपके लिए भी सकारात्माक और शुभ सोचने लग जायेगा क्योकि आपकी तरफ से उस मनुष्य को सकारात्मकता का अनुभव हो रहा है.
4- संस्कार परिवर्तन – आज इस कलयुगी दुनिया मे रहते हम सभी को जो रंग चढ़ा है अब उसे हटाकर सच्चा रंग चढ़ाना है अर्थात कड़वाहट का रंग निकालकर अच्छाई का रंग लगाना है इसे ही कहते है संस्कार परिवर्तन.
कार्यक्रम के अंत में बी.के. मुकुल भाईजी ने सभी को मैडिटेशन करवाया.
कार्यक्रम का कुशल संचालन एवं आभार बी.के. प्रहलाद भाई द्वारा किया गया.

By nit

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