अशफ़ाक़ कायमखानी, ब्यूरो चीफ, जयपुर (राजस्थान), NIT:

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पारिवारिक मामलों में पत्नी की सुरक्षा और सुविधा का ध्यान रखना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही पति की चुनौतियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल पति को परेशान करने के उद्देश्य से दायर याचिका निरस्त किए जाने योग्य है।
मामले में पत्नी ने मेड़ता स्थित पारिवारिक न्यायालय में लंबित तलाक प्रकरण को जोधपुर स्थानांतरित करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
पति की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता यूसुफ खान ने तर्क दिया कि पत्नी ने याचिका में जोधपुर का कोई स्थायी पता प्रस्तुत नहीं किया और न ही सही तथ्यों का उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि पत्नी द्वारा दायर सभी प्रकरण मेड़ता में ही लंबित हैं तथा पति नियमित रूप से मासिक भरण-पोषण राशि अदा कर रहा है। ऐसे में केवल प्रकरण को लंबित कर पति को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से स्थानांतरण याचिका प्रस्तुत की गई है। अधिवक्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय Sushmita B.L. @ Uma बनाम श्री राघवेंद्र बी.आर. का भी हवाला दिया।
न्यायमूर्ति रेखा बोराणा की एकलपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि गलत आधारों पर दायर इस प्रकार की याचिका पति को प्रताड़ित करने का प्रयास प्रतीत होती है। अदालत ने पारिवारिक न्यायालय में लंबित विवाह विच्छेद प्रकरण में किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं मानते हुए पत्नी की स्थानांतरण याचिका निरस्त कर दी।

