प्राचीन जल स्त्रोतों एवं वनों का संरक्षण एवं संवर्धन करना होगा: डाॅ नरोत्तम मिश्र. गृह मंत्री ने पौधारोपण कार्यक्रम में लिया भाग | New India Times

गुलशन परूथी, ब्यूरो चीफ, दतिया (मप्र), NIT:

प्राचीन जल स्त्रोतों एवं वनों का संरक्षण एवं संवर्धन करना होगा: डाॅ नरोत्तम मिश्र. गृह मंत्री ने पौधारोपण कार्यक्रम में लिया भाग | New India Times

मध्यप्रदेश शासन के गृह, जेल, संसदीय कार्य एवं विधि विधायी विभाग के मंत्री डाॅ. नरोत्तम मिश्र ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुध उपयोग करने से हमारा परिस्थतिक तंत्र (यूको सिस्टम) प्रभावित हो रहा है। जिसके कारण हमें दुष्परिणाम देखने को मिल रहे हैं। आवश्यकता है कि हम प्राचीन जल स्त्रोतों, वनों जैसी प्राकृतिक संपादाओं का संरक्षण एवं संरक्षित करें।
गृह मंत्री डाॅ. मिश्र रविवार को दतिया सेवढ़ा वाईपास के पास आयोजित स्मृतिवन में आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर पौधारोपण कार्यक्रम में भाग लिया।

गृह मंत्री डाॅ. नरोत्तम मिश्र ने पौधारोपण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जहां वन हुआ करते थे आज वहां वन भूमि तो है लेकिन वृक्ष नहीं है। जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि हमें पेड़-पौधों, प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझना होगा। प्रकृति का अपने स्वार्थ के लिए दुरूपयोग करने से आज वृक्षों की संख्या कम हुई वन क्षेत्र के रकवे में कमी देखने को मिल रही है। जिसका परिणाम है कि वनप्राणी एवं जलीय प्राणी अपेन आवास क्षेत्र को छोड़कर वस्ती एवं शहरी क्षेत्रों में आ रहे है। जो चिंता का विषय है।

गृह मंत्री ने कहा कि हमने जंगलों में खड़े हरे-भरे वृक्षोें का खूब दोहन किया। आरा मशीनों पर भी वृक्षों को कटने से नहीं रोका। आज स्थिति यह है कि दिन प्रतिदिन वृक्षों की कमी महसूस होने लगी जिसका सीधा प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ा है।

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में हम वृक्षों के महत्व को भली भांति समझ चुके है। वृक्ष ही हमें प्राण-वायु आॅक्सीजन देते है। विभिन्न रोगों के उपचार में उपयोग किया जाता है। अतः हम जो पौधा लगाये उसके लगाने के साथ आगे वृक्ष बनने तक उसकी परवरिश एवं संरक्षण की व्यवस्था भी हमें करना होगी। ऐसा कार्य करें कि यह स्थान पौधारोपण के क्षेत्र में अन्य स्थानों के लिए नजीर बन सके।

डाॅ. मिश्र ने कहा कि हमारे घरो की संस्कृति के अंदर ही पूरा विज्ञान है। भारतीय संस्कृति में घरो के आंगन में तुलसी लगाने, घर के आगन को गाय के गोबर से लीपने एवं घर में प्रवेश करने से पूर्व घर के बाहर जूते-चप्पल उतारकर अपने हाथ-पैर धोने के बाद ही घर में प्रवेश के पीछे भी वैज्ञानिक सोच रही है। उनहोंने कहा कि हमने अपनी प्राचीन संस्कृति एवं सभ्यता को छोड़ा जिसके हमे दुष्परिणाम देखने को मिल रहे है। हमे जड़, जंगल और जमीन के महत्व को समझना होगा। कोरोना की लहर का असर शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में कम देखने को मिला। जिसके पीछे ग्रामीणों का प्रकृति के साथ जीना था। इसके लिए परम्परा, संस्कृति एवं सभ्यता के साथ जुड़ा रहना होगा।

डाॅ. मिश्र ने त्रिफला के महत्व को बताते हुए कहा कि त्रिफला के उपयोग करने वाला व्यक्ति लंबे समय तक जीता है। इससे पेट की बीमारियों से निजात मिलता है। इसके उपयोग मंे होने वाला फल आंवला अमृत के समान है। जो बहु औषधीय गुण से भरपूर है। उन्होने लोगों से कहा कि लंबे समय तक जीना है तो प्रकृति के साथ सुबह की पैदल सैर करना होगा। अन्यथा जीवन को दवाआंे पर चलना होाग। उन्होंने लोगों से कहा कि वह अपनी राशि के अनुरूप भी पौधे लगा सकते है।

कार्यक्रम के शुरू मंे श्री बंटी कुरेले ने बताया कि इस स्मृतिवन में एक हजार एक पौधे लगाये जायेंगे। इसमें अपने परिजनों की स्मृति चिरस्थाई रखने हेतु पौधे लगा सकेंगे। उन्होंने इस दौरान श्री इंदर सिंह रावत, श्री राजा सिंह, श्री अच्चे लाल कुशवाहा, श्री अजय कुशवाहा आदि का सम्मान भी किया।

इस अवसर पर कलेक्टर श्री संजय कुमार, पूर्व विधायक श्री प्रदीप अग्रवाल सर्वश्री विक्रम बाबा बुन्देला, गिन्नी राजा परमार, पप्पू पुजारी, माद्यवेन्द्र सिंह पहिरार, अतुल भूरे चैधरी, आकाश भार्गव, साहब सिंह यादव, दीपक बेलपत्री आदि उपस्थित थे।

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