राजस्थान कांग्रेस में तेजी के साथ घट रहे राजनीतिक घटनाक्रम कहीं गहलोत के मुख्यमंत्री पद की बली ना ले लें

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अशफाक कायमखानी, ब्यूरो चीफ, जयपुर (राजस्थान), NIT:

पिछले चार-पांच महीने पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की जारी तबादला सूची में हाईकमान के नजदीकी दो-तीन अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाकर महत्वहीन पदों पर पदस्थापित करने के अलावा राहुल गांधी सहित कुछ नेताओं को छोटे शब्दों से सम्बोधित करने वाले एक कवि की पत्नी को राजस्थान लोकसेवा आयोग का सदस्य मनोनीत करने के बाद मुख्यमंत्री गहलोत व हाईकमान के मध्य चले शह व मात के खेल के बाद वर्तमान में घट रहे राजनीतिक घटनाक्रमों से लगता है कि गहलोत के मुख्यमंत्री पद की बली लग सकती है।
एक साल पहले पायलट व गहलोत समर्थक विधायकों के मध्य एक दूसरे पर राजनीतिक दवाब बनाने की चेष्टा के चले घटनाक्रम के बाद कांग्रेस की राष्ट्रीय महामंत्री प्रियंका गांधी के मार्फत गहलोत की इच्छा के विपरीत पायलट समर्थक विधायकों के कांग्रेस में वापस लौट आने को गहलोत पचा नहीं पा रहे हैं। इसके चलते उन्होंने कुछ ऐसे कदम उठाये जो हाईकमान को निचा दिखाना जैसा बताते हैं। पिछले करीब 6 महीने से मुख्यमंत्री का दिल्ली ना जाना एवं अपने हिसाब से अपने लोगों को संवैधानिक पदों पर एक एक करके मनोनीत करना हाईकमान की अथॉरिटी को चेलैंज करना बताया जा रहा है।
पिछले चार महीने से हाईकमान के निर्देश पर प्रभारी महामंत्री अजय माकन के मार्फत मिलते रहने के बावजूद मुख्यमंत्री द्वारा अलग अलग चाल चलते रहना राजनीतिक तौर पर उनके खिलाफ जा रहा बताते हैं। आखिरकार अध्यक्ष के बाद पार्टी में दूसरे महत्वपूर्ण पद वाले संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल व प्रभारी महामंत्री माकन के एक साथ जयपुर आकर मुख्यमंत्री को हाईकमान की मंशा से अवगत कराने पर उनके द्वारा बहाने तलाशे गये। प्रभारी महामंत्री माकन द्वारा दो दिन राजस्थान के दौरे में विधायकों से राय लेने के तहत आज पहले दिन पूछे जा रहे सवाल सरकार पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं। माकन से आज मिले विधायकों में से अधीकांश विधायकों ने अपनी विशेष प्रतिक्रिया ना देकर यह कहा बताते हैं कि हाईकमान जो तय करे व निर्देश देगा वो मान्य है।
पिछले साल घटे राजनीतिक घटनाक्रम के समय मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा था कि राजनीति में जो होता है वो दिखता नहीं और जो दिखता है वो होता नहीं। वर्तमान समय में राजस्थान को लेकर कांग्रेस मे घटता घटनाक्रम जो नजर आ रहा है वो वास्तव में वेसा हो नहीं रहा है। इसके अलावा राजस्थान व पंजाब के मुख्यमंत्रियों को लेकर पत्रकार शकील अख्तर के ट्वीट को माकन द्वारा रिट्वीट करने को हल्के में नहीं लेना चाहिये। उसके बाद पायलट द्वारा गहलोत पर बिना नाम लिये यह कहना कि हम सरकार बरकरार नहीं रख पाते। 156 सीट मिलने के बाद 50 सीट पर व 96 सीट से बीस सीट पर आकर ठहरना अलग कुछ होने का इशारा करता है।
आखिर के 6 महीने में कुछ करना कुछ नहीं होना मानते हुये सरकार के पास केवल 20-21 महीने शेष हैं। जिसमें सरकार मतदाताओं को आकर्षित करने के लिये कुछ कर सकती है। हाईकमान मुख्यमंत्री गहलोत के पिछले दो कार्यकाल को सामने रखकर उन्हें सरकार रिपीटर नहीं मानती है जबकि हाईकमान हर कीमत व सूरत में वर्तमान सरकार की तरह प्रदेश में 2023 के चुनाव के बाद भी कांग्रेस सरकार बनना देखना चाहती है।
कल प्रभारी महामंत्री अजय माकन के जयपुर के लिये उडान भरने से पहले अचानक पायलट के दिल्ली जाकर एक घंटे वार्ता करने के अलावा पायलट के उच्च नेतृत्व से गुपचुप मिलना काफी कुछ अलग संकेत कर रहा है। मुख्यमंत्री गहलोत सरकार में विधायक सबकुछ है। उनकी बिना इजाजत उनके क्षेत्र में पत्ता भी नहीं हिल सकता। अजय माकन के जयपुर आकर विधायकों से मिलने से पहले विधायकों की मंशा अनुसार राजस्थान प्रशासनिक सेवा के 283 अधिकारियों की जम्बोजेट तबादला सूची जारी करके उनको संतुष्ट करने व असंतोष दबाने की कोशिश भी हुई है।
कुल मिलाकर यह है कि वर्तमान समय में राजस्थान कांग्रेस में जो कुछ होता दिख रहा है वास्तव वो हो नहीं रहा है बल्कि बहुत कुछ अंदर खाने हो रहा है जो अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री पद की बली भी ले सकता है।मुख्यमंत्री इसी तरह हाईकमान के सामने अड़े रहे तो अगले महीने अलग से बहुत कुछ राजनीतिक घटनाक्रम होता नजर आ सकता है।

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