अबरार अहमद खान, भोपाल, NIT;
पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मंदसौर किसान आंदोलन मे मारे गये किसानों के परिजनों से कल देर रात तक मंदसौर जिले के अलग अलग ग्रामों मे जाकर ग़मज़दा परिवारों से रूबरू हुए। शिवराज सिंह पर निशाना साधाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने स्वार्थ के लिये जिन मृत किसानों की चिता की राख भी ठंडी नही हुई उनके परिजनों को मंदसौर से भोपाल अपना उपवास तुड़वाने के लिये बुलाया था। यह उनहोंने घिनौना षडयंत्र किया है इसलिए उन्हें नैतिकता के आधार पर तत्काल इस्तीफा देना चाहिये।
पिछले दिनों जब सिंधिया मंदसौर मृत किसानों के परिजनों से मिलने जा रहे थे तो उन्हें जाने नहीं दिया गया और मुख्यमंत्री को जाने दिया गया। सरकार नहीं चाहती है कि कोई विपक्ष का नेता मृत किसानों के परिजनों से मिले, ताकि उनकी पोल पट्टी नहीं खुल जाये, इसलिए कल बिना सूचना के वह खलघाट से इंदौर न जाते हुये मंदसौर चले गये जहां उन्होंने लोध, बरखेडा पंथ, बडवन, चिलोड, नयागांव पिपलिया ,टकरावदा ,नयाखेड़ा में जाकर मृत परिजनों को सांत्वना देकर कहा की वह अपने को अकेला महसूस न करें,हवह और कांग्रेस पार्टी उनके साथ है। उन्हें बताया गया कि नया खेडागांव के चेनाराम की शादी हाल ही में 29 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर हुई थी। इनके पिता के पास कुल 2 बीघा जमीन है। मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पेट भरते थे। चेनाराम भी पुलिस की गोलीबारी का शिकार हुए थे। यह सुन सिंधिया जी की आँखें नम हो गयीं और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। इसी तरह ग्राम बरखेड़ा पंथ के 12वी कक्षा के जीव विज्ञान के छात्र अभिषेक चार भाई-बहनों में सबसे छोटा था। शांतिपूर्वक आंदोलन के दौरान पुलिस ने अभिषेक को नज़दीक से गोली मार दी थी।
सिंधिया ने इन परिवारों से मिलने के बाद मीडिया से चर्चा में कहा की मुख्यमंत्री में ज़रा सी भी नैतिकता बची हुई है तो उन्हें तत्काल इस्तीफा देना चाहिये क्योंकि उन्होंने उस परिवार को अपने स्वार्थ के लिये भोपाल बुलाया जिनके घर ग़म का महौल था और पूरा परिवार अपने बच्चे की मौत पर आंसू बहा रहा था। क्या यह घिनौना कृत्य नही है ?
