मेहलक़ा अंसारी, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

हम भारत के लोग नामक संस्था के बैनर तले वर्तमान केंद्र सरकार के काले कानून के विरोध में बुरहानपुर के शाहीन बाग (शौकत मैदान) पर भारी जनसमर्थन से धार्मिक विद्वानों और उलेमाओं के संरक्षण में और विभिन्न जाति व धर्म के लोगों और अनेक सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा किए जा रहे सीएए विरोधी आंदोलन से शायद जिला प्रशासन घबरा गया है, यही कारण है कि जिला प्रशासन की ओर से गुरुवार एवं शुक्रवार 30 और 31 जनवरी 2020 को आंदोलन की सरकारी अनुमति नहीं दी गई। जानकारी के अनुसार 01 फ़रवरी 2020 शनिवार और 2 फ़रवरी 2020 रविवार को भी आंदोलन के लिए वांछित अनुमति नहीं मिलने से आयोजकों द्वारा आंदोलन स्थगित किया गया है। सीएए के खिलाफ आंदोलन के लिए जिन प्रभावशाली नेताओं ने बीड़ा उठाया है उन में से अधिकांश नेताओं का संबंध सत्ताधारी दल से है। सत्ताधारी दल से संबंधित होने के बावजूद प्रजातांत्रिक ढंग से आंदोलन की अनुमति नहीं मिलने से जनता के समक्ष कई प्रश्न उभरकर सामने आ रहे हैं, जनता यह सोचने पर मजबूर है कि क्या यहां पूर्व सत्ताधारी दल भाजपा का शासन है जो अनुमति नहीं मिल रही है।
