ज़फ़र खान, अकोट/अकोला (महाराष्ट्र), NIT:
“तेरे जाने की खुशी और दिल उदास है” — यह पंक्ति इन दिनों अकोट शहर के लोगों की भावनाओं को बयां कर रही है। हम बात कर रहे हैं अकोट शहर थाना प्रभारी अमोल माडवे की, जिनका हाल ही में तबादला हुआ है।
अमोल माडवे की नियुक्ति अकोट शहर थाना प्रभारी के रूप में 10 मई 2024 को हुई थी। देखते ही देखते उनका लगभग 25 माह का कार्यकाल कब बीत गया, इसका एहसास ही नहीं हुआ। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अनेक प्रभावी कार्रवाइयाँ कीं और शहर में किसी भी जातीय या सांप्रदायिक विवाद को बढ़ने नहीं दिया।
उनके शांत स्वभाव, सरल व्यक्तित्व और निष्पक्ष कार्यशैली ने न केवल पुलिस विभाग के कर्मचारियों, बल्कि आम नागरिकों का भी दिल जीत लिया। जो भी व्यक्ति उनसे मिला, वह उनके व्यवहार और कार्यप्रणाली से प्रभावित हुए बिना नहीं रहा।
अमोल माडवे के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था बेहतर रही और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण देखने को मिला। शहर के अनेक लोगों का मानना है कि उनके नेतृत्व में पुलिस प्रशासन ने आमजन को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अकोट में कई ऐसे नागरिक रहे, जिनका किसी अवैध गतिविधि या विवाद से कोई संबंध नहीं था, लेकिन घरेलू, पारिवारिक या संपत्ति संबंधी छोटे-मोटे विवादों के कारण उन्हें पुलिस थाने का सहारा लेना पड़ा। ऐसे मामलों में भी अमोल माडवे ने संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ लोगों की समस्याओं का समाधान कर उन्हें त्वरित न्याय दिलाने का प्रयास किया।
उनके तबादले की खबर से मजदूरों, व्यापारियों और आम नागरिकों में भावुकता देखने को मिली। लोगों ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि एक ओर उन्हें नई जिम्मेदारी मिलने की खुशी है, वहीं दूसरी ओर उनके जाने से शहर का दिल उदास है। अकोटवासियों का मानना है कि अमोल माडवे ने अपने कार्यों और व्यवहार से जो पहचान बनाई है, वह लंबे समय तक लोगों के दिलों में बनी रहेगी।

