अशफ़ाक़ क़ायमखानी, ब्यूरो चीफ, जयपुर (राजस्थान), NIT:

कायमखानी बिरादरी द्वारा दादा नवाब कायमखां का 607वां शहादत दिवस राज्यभर में श्रद्धा, परंपरा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जिला, तहसील, गांव एवं ढाणियों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें फातिहाखानी, दुआ-ए-मग्फिरत, प्रतिभा सम्मान समारोह और रक्तदान शिविर प्रमुख रहे। घर-घर खीर-चूरमा जैसे पारंपरिक व्यंजन भी बनाए गए।
इतिहास के अनुसार, राजपूत चौहान वंश के मोटेराव चौहान के पुत्र करमचंद चौहान एवं उनके भाइयों द्वारा इस्लाम धर्म स्वीकार करने के बाद उनके वंशज कायमखानी कहलाए। बाद में नवाब कायमखां के नाम से प्रसिद्ध इस वंश ने समाज में अपनी अलग पहचान बनाई।

मुख्य समारोह चूरू जिले के ददरेवा गांव स्थित नवाब कायमखां की जन्मस्थली एवं स्मारक स्थल पर आयोजित हुआ, जहां पूर्व मंत्री एवं निर्दलीय विधायक यूनूस खान की देखरेख में हजारों लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं और शहीदों के परिजनों का सम्मान किया गया।

ददरेवा के अलावा सीकर, झुंझुनूं, चूरू, डीडवाना, नागौर, बीकानेर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, जयपुर, जोधपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और टोंक सहित अन्य जिलों में भी समारोह आयोजित हुए। विभिन्न सामाजिक संगठनों और कायमखानी छात्रावासों में भी प्रतिभा सम्मान और रक्तदान शिविर लगाए गए।
इस अवसर पर समाज के लोगों ने अपनी शौर्य परंपरा को बनाए रखने, देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करने और युवाओं को सेना में जाने के लिए प्रेरित करने का संकल्प व्यक्त किया। जयपुर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा भी कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कुल मिलाकर कायमखानी बिरादरी ने अपने पूर्वज नवाब कायमखां के शहादत दिवस को हर वर्ष की तरह इस बार भी पूरे सम्मान, सामाजिक एकता और परंपरागत उत्साह के साथ मनाया।

