अंकित तिवारी, वाराणसी (यूपी), NIT:

महात्मा गांधी न केवल एक व्यक्तित्व का नाम है बल्कि एक विचारधारा का नाम है, आज देश में जो परिस्थितियां हैं उसमें गांधी बहुत ही प्रासंगिक हैं। गांधी जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे इसीलिए उन्हें सभी विषयों के विद्यार्थी अपने अपने पाठ्यक्रमों में पढ़ते हैं। गांधी जी अपने जीवन मे जिन मूल्यों की बात करते थे उन्हें शिद्दत से जीते भी थे। आज उन्हें याद करते हुए उनके बताए मूल्यों को जीवन मे उतारने की आवश्यकता है, ये विचार सर्व सेवा संघ, राजघाट के सभागार में महात्मा गांधी जी की 150 वीं जयंती के अवसर पर सर्व सेवा संघ द्वारा आयोजित “गांधी की प्रासंगिकता” विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए एडीएम एम एम वर्मा ने कही। विशिष्ट वक्ता के रूप में बोलते हुए सुरेश कुमार अकेला ने कहा कि जब हम आज गांधी जी को याद कर रहे हैं तो इस बात को गम्भीरता से समझ लेना चाहिए कि उनके और डॉ अम्बेडकर जी मे केवल मतभेद था कुछ बिन्दुओ पर , लेकिन उनके बीच मतभेद नही था, अतः हमें महापुरुषों के बीच एकता साम्य को खोजना चाहिए जिससे राष्ट्रीय एकता का निर्माण हो । आज समय की यही मांग है।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में आत्मप्रकाश जी ने कहा कि बापू के विचारों को हमे बच्चो के बीच प्रमुखता से रखने की आवश्यकता है तभी हम बापू के सपनो का भारत बना सकते हैं । संगोष्ठी डॉ रियाज़ अहमद,यसुधीर जायसवाल, खुर्शीद आलम, बिलाल अहमद, जफर बनारसी, शक्ति कुमार बनारसी, साहिल अहमद, आदि ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ मोहम्मद आरिफ ने तथा धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजिका शीलम झा ने किया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से शाहीन अंसारी, सुधीर जायसवाल, प्रेमप्रकाश, तारकेश्वर, नंदकिशोर, नीलाभ लोचन, महेंद्र भाई, अनूप कुमार, सुशील
कुमार, सविता, विमला आदि लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत मे सर्व सेवा संघ राजघाट से टाउनहाल गांधी प्रतिमा तक पदमार्च निकाला गया और वहां गांधी प्रतिमा पर सर्वधर्म प्रार्थना का आहोजन किया गया।
