अशफाक कायमखानी, जयपुर (राजस्थान), NIT:

राजस्थान का कायमखानी समुदाय सियासत में पलटी मारकर सियासी हक पाने मे हमेशा अगुवा रहा है लेकिन फतेहपुर से लगातार तीन दफा भवंरु के कांग्रेस से व डीडवाना से अलग अलग समय भाजपा के यूनूस खां के विधायक बनने के बाद कांग्रेस व भाजपा में राज्य के अलग अलग हिस्सों में रहकर कायमखानी समाज के नेतागण सियासत करते रहे हैं लेकिन अब कांग्रेस में उचित उम्मीदवारी नहीं मिलने की सम्भावना के कारण कायमखानी समुदाय अब काग्रेस की बजाय भाजपा व बसपा की तरफ आकर्षित होता साफ नजर आ रहा है।
राजस्थान में शेखावाटी जनपद, बीकाणा व मारवाड़ क्षेत्र में प्रमुख रुप से निवास करने वाले कायमखानी समुदाय के 1967 में सर्वप्रथम फतेहपुर से स्वतंत्र पार्टी से आलम अली खां ने विधायक बनकर गैर कांग्रेस का बीज समाज मे बोने का काम किया था। फिर 1972- में मंडावा से मामूली अंतर से स्वतंत्र पार्टी के निशान पर चुनाव लड़ने वाले ऐजाज नबी खान एडवोकेट ने इस बीज को पानी देकर अंकूरित किया था। उसके बाद रमानज खां ने पुष्कर से भाजपा के निशान पर एवं उसी तरह डीडवाना से यूनुस खां ने विधायक बनकर आलम अली खां द्वारा बोये गैर कांग्रेसी विचारधारा के बीज से बने पोधे को खाध व पानी देकर बढाने का कार्य किया।
कांग्रेस की तरफ से फतेहपुर से 1957 में गफार खां के विधायक बनने के बाद 1980 में चूरु से भालूखा के कांग्रेस की तरफ से विधायक बनने पर कायमखानी समुदाय का ठीक से कांग्रेस की तरफ फिर से रुख हुआ जिस रुख को 1998 में फतेहपुर से भवंरु खां ने कांग्रेस निशान पर विधायक बनकर मजबूती प्रदान की। तीन दफा लगातार फतेहपुर से कांग्रेस के निशान पर भवंरु खां विधायक बनने के बाद उनके देहांत के बाद कायमखानी समाज एक दफा फिर दोराहे पर खड़ा है कि वो कांग्रेस के साथ रहे या फिर प्रतिनिधित्व ना मिलने के कारण कांग्रेस को तलाक देकर गैर कांग्रेसी दलों से हाथ मिलाकर अपना सियासी हक पाने की नये सिरे से कोशिश करे। दूसरी तरफ इतिहास पर नजर डालें तो पाते हैं कि चूरु लोकसभा क्षेत्र से 1979 में जनता पार्टी की तरफ से आलम अली खां ने लोकसभा चुनाव लड़कर कांग्रेस को काफी पीछे धकेलकर तीसरे नम्बर पर फैंका तो उसके अगले लोकसभा चुनाव 1984 में कांग्रेस ने झूंझुनू से कैप्टन अय्यूब खां को उम्मीदवार बनाया और वह चुनाव जीतकर राजस्थान से लोकसभा के पहले मुस्लिम सांसद बने।
अगले दिसंबर माह में होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव मे डीडवाना से विधायक यूनुस खां का भाजपा के निशान पर चुनाव लड़ना लगभग तय है। वही बसपा की तरफ से फतेहपुर से बेसवा सरपंच जरीना खान व मंडावा से अनवर खान ने अपना चुनाव प्रचार शूरु कर रखा है। जबकि झूंझुनू, लाडनू व चूरु से बसपा की तरफ से तीन दिग्गज कांग्रेसी नेताओं के पार्टी छोड़कर बसपा के निशान पर चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। भाजपा की तरफ से पुष्कर से वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन सलावत खां व मंडावा से मदरसा बोर्ड के पूर्व चेयरमैन हिदायत खां धोलीया भी दावेदारी मजबूती से कर रहे हैं जबकि फतेहपुर से हाकम अली खां, मण्डावा से लियाकत अली खां व शब्बीर खां, लाडनू से लियाकत खां व वारस अली खां, डीडवाना से हबीब खां, आदर्श नगर से अशफाक हुसैन, सीकर से वाहिद चौहान व अशफाक हुसैन IAS, व चूरु से डा.निजाम मोहम्मद सहित अनेक कायमखानी कांग्रेस से टिकट पाने की दोड़ लगा रहे हैं।
कुल मिलाकर यह है कि कांग्रेस पार्टी से कायमखानी समाज के अनेक नेता टिकट पाने का जुगाड़ करने में लगे हुये हैं लेकिन टिकट ना मिलने पर कुछ नेता बसपा का दामन भी थामते सकते हैं। कुछ नेताओं ने तो कांग्रेस से किसी कायमखानी को टिकट ना मिलना मानकर बसपा सहित अन्य दलों से टिकट लेकर चुनाव प्रचार तक करना शूरु कर दिया है।
