सुल्तानगढ़ झरना हादसा: लाचार सरकारी अमले के सामने स्थानीय नौजवानों ने कायम की बहादुरी की मिसाल, चट्टान पर फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला | New India Times

संदीप शुक्ला, सुल्तानगढ़/ग्वालियर (मप्र), NIT;​सुल्तानगढ़ झरना हादसा: लाचार सरकारी अमले के सामने स्थानीय नौजवानों ने कायम की बहादुरी की मिसाल, चट्टान पर फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला | New India Timesसुल्तानगढ़ वाटरफॉल में अचानक आई बाढ़ के मामले में प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। सेना का रेस्क्यू आॅपरेशन काफी देर से शुरू हुआ जिसके चलते 40 लोग बाढ़ के पानी में फंसे रह गए। अंधेरा हो जाने के कारण रेस्क्यू आॅपरेशन बंद कर दिया गया था और सरकारी अमला सुबह होने का इंतजार कर रहा था कि तभी मोहन के रहने वाले 3 ग्रामीण जवान आए और मौत बनकर दौड़ रहे बाढ़ के पानी को चीरते हुए ना केवल बाढ़ में फंसे हुए 40 लोगों तक पहुंच गए बल्कि सभी को सुरक्षित बाहर भी निकाल लाए।​सुल्तानगढ़ झरना हादसा: लाचार सरकारी अमले के सामने स्थानीय नौजवानों ने कायम की बहादुरी की मिसाल, चट्टान पर फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला | New India Times

सेना का हेलीकॉप्टर केवल 6 लोगों को बचा पाया

कल शाम से सुल्तानगढ़ के वाटर फॉल में अचानक आई बाढ के कारण चट्टान पर 46 सैलानी फंस गए थे। रेस्क्यू के लिए हेलीकॉप्टर बुलाया गया। हैलीकॉप्टर ने 6 लोगों को सुरक्षित बहार निकाल लिया लेकिन अंधेरा होने के कारण हेलीकॉप्टर न फिर उडान नही भरी जिस कारण सैलाब के बीच फंसे 40 लोगों की सांसे अटक गई थीं और पूरे प्रशासन की सांसे तेज हो गई थी।

ये हैं सुल्तानगढ़ हादसे के हीरो

सुल्तानगढ़ झरना हादसा: लाचार सरकारी अमले के सामने स्थानीय नौजवानों ने कायम की बहादुरी की मिसाल, चट्टान पर फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला | New India Times​प्रशासन आधी रात तक पानी कम होने का इंतजार करता रहा। दो जिलों का पूरा प्रशासन और आईटीव्हीपी की रेस्क्यू टीम पानी कम और सुबह होने का इंतजार कर रही थी कि तभी मोहना के तीन युवा उठे और प्रशासन से बातचीत की कि हम बाढ़ में फंसे लोगों को निकाल सकते हैं। मोहना निवासी निजाम शाह, कल्ला बाथम और रामसेवक प्रजापति ने कहा कि हम यहां के लोकल हैं और हमने यह सूखी नदी देखी है। हम इन लोगों को निकाल सकते हैं, आप अपने रेस्क्यू के संसाधन उपलब्ध करा दें। बताया जा रहा है इन तीनों युवाओं ने अपनी कमर से रस्सी बांधी और पहले से बंधी हुई रस्सी को पकडकर बाढ़ को चीरते हुए उस चट्टान तक जा पहुंचे जहां 40 लोग फंसे हुए थे। वहां बाढ़ में फंसे लोगों को हिम्मत दिलाई और एक-एक कर चट्टान से किनारे तक ले आए। कुल मिलाकर रात भर में तमाम सरकारी संसाधन जो नहीं कर पाए, वो गांव के 3 जवानों ने कर दिखाया। 

चट्टान पर फंसे लोगों के नाम

अतुल प्रेम सिंह राजपूत भोडापुर, रोबिन राजपूत हजीरा, कुलदिप रायकवार हजीरा, सोहिल अंसारी भौडापुर, अभिषेक वैश्य हजीरा, नंदू हजीरा, आयूष राजपूत हजीरा, और संस्कार हजीरा उक्त सभी दोस्त हैं। वहीं सीताराम पुत्र मेहरबान कुशवाह, उत्तम पुत्र मेहरबान कुशवाह और प्रंशात पुत्र रामअवतार कुशवाह सभी निवासी ग्वालियर सिंकदर कंपू। कुलदीप पुत्र रामअवतार पंछी नगर, अरूण पुत्र शिव सिंह जाटव, और कुशल पुत्र विजय सिह जाटव सभी निवासी ठाटीपुर ग्वालियर।

महिन्द्रा कंपनी के कर्मचारी इरफान पुत्र अजीत खान गुडा-गुडी का नाका, नौशाद खान, मुस्ताक खांन ठाटीपुर, शादिक पुत्र इरसाद खान अबार पुरा, रामसेवक प्रजापति रजौदा,मनीष पुत्र हीरालाल अहिरवार नईसडक, चांद खान (हेलीकापटर में गया) जितेन्द्र परिहार टेकनपुर।

सौरभ पुत्र सुरेश भदौरिया चार शहर का नाका, शैलेश पुत्र महेश तोमर चार शहर का नाका, अतुल महेश राजपूत बिरला नगर, अमित जगदीश ग्वालियर और शाहरूख खांन और तरूण, जगताप, अनिल, सहानी।

लापता लोगों के नाम

विशाल चौहान पुत्र प्रदीप चौहान, लोकेन्द सिह भगवान सिह गिरवाई, अभिषेक पुत्र गब्बर गिरवाई, रवि कुशवाह उम्र 19 साल, ऋषीकांत पुत्र श्याम लाल कुशवाह शिंदे की छावनी।

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