वी.के.त्रिवेदी, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT;
भारत नेपाल सीमा को जोड़ने वाला मुख्य खखरौला मार्ग आज भी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। जन प्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार यह मुख्य मार्ग लोगों के लिये परेशानी का सबब बना हुआ है।जान जोखिम में डालकर भारत नेपाल के लोग इस मार्ग से गुजरते हैं जबकि सलाना इसी मार्ग से दोनों देशों को करोड़ों का फायदा होता है।
बताते चलें कि भारत नेपाल का यह खखरौला मार्ग व्यापारिक द्रष्टिकोण को देखते हुये पूर्व सपा सरकार ने इस मार्ग को जोड़ने के लिये नेपाल को बुन्देलखण्ड से जोड़ने के लिये फोरलेन की घोषणा की थी लेकिन सत्ता बदलते ही यह महज घोषणा बनकर रह गयी है। तत्कालीन भाजपा सरकार भारत नेपाल के इस मुख्य मार्ग को मानसरोवर से जोड़ने के लिये घोषणा तो कर दी है परन्तु यह मार्ग आज भी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। लोगों को इस मार्ग पर चलना दुर्भर है। आये दिन भारत नेपाल के लोग दुर्घटना में चोटिल होते रहते हैं।नेपाल की मूल भंसार मुहाना नदी पर कटती है व नेपाल सरकार का पुल भी बना हुआ है। खखरौला एसएसबी कैंम्प से महज चार सौ मीटर की दूरी पर आज तक रपटा पुल न बनने के कारण आने जाने वाले राहगीरो को जान जोखिम में डालकर यह मार्ग तय करना पडता है।जन प्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण इन्दरनगर, दाराबोझी, सूरतनगर, तिकुनियां के ग्रामीणों में रोष व्याप्त है क्योकि इन गांवों के लोग अपना व्यापार नेपाल से करते हैं और सैकडों लोगों का आवागमन इसी मार्ग से होता है।
