बुरहानपुर में सिंधी समाज के शिक्षकों ने मनाया सिंधी भाषा दिवस | New India Times

मेहलका अंसारी, बुरहानपुर (मप्र), NIT; 

बुरहानपुर में सिंधी समाज के शिक्षकों ने मनाया सिंधी भाषा दिवस | New India Times​सिंधी समाज के सक्रिय कार्यकर्ता धीरज नावानी ने बताया कि एक्सीलेंट किड्स गैलेक्सी स्कूल सिंधी बस्ती में समाज के शिक्षकों द्वारा सिंधी भाषा दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में भगवान श्री झूलेलाल के तेलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया गया। सिन्धी भाषा के संरक्षण एवं विकास हेतु स्व. कवि लक्ष्मणदास वाधवानी, स्व. कवि सुगनाराम सचदेव, पूर्व पार्षद स्व. मेहरचंद गुनवानी द्वारा दिए गये योगदान को स्मरण किया गया।

सिंधी भाषा के संरक्षण के लिए समाज के शिक्षकों में जागरूकता लाने के लिए सिंधी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष राजेंद्र प्रेमचंदानी और इतिहासकार बलराज नावानी के मार्गदर्शन में सिंधी साहित्य अकादमी संस्कृति परिषद मप्र शासन के पाठक मंच का गठन किया गया। उल्लेखनीय है कि बुरहानपुर, मध्य प्रदेश का पहला ज़िला है, जहां इसका गठन किया गया है और अकादमी द्वारा 20 से अधिक पुस्तकें भी उपलब्ध कराई गई हैं। ​बुरहानपुर में सिंधी समाज के शिक्षकों ने मनाया सिंधी भाषा दिवस | New India Timesकार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती इन्द्रादेवी थावानी ने कहा कि बदलाव की शुरुवात अपने घर से होती है, अतः घर में बच्चो एवं परिवार के सभी सदस्यों से मात्र भाषा में ही बात करने पर ज़ोर दिया गया।

अतिथि अशोक मंजवानी ने सिंधी भाषा व उसकी उपबोलियों की विस्तार से जानकारी दी तथा बताया कि प्रख्यात सिंधी साहित्यकारों एवं समाज के वरिष्ठ नेताओं की विशेष मांग पर 1967 में सिन्धी भाषा को संविधान के 8 वें अनुच्छेद में शामिल होने की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।   

विजय अगनानी ने बताया कि युवा वर्ग आज सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग कर रहा है, अतः सोशल मिडिया में सभी सामाजिक ग्रुप में सिन्धी पोस्ट, कविताएं, लेख इत्यादि शेयर किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम संयोजक धीरज नावानी ने कहा सिंधी भाषा मूलत: संस्कृत से सिंधी भाषा की उत्पत्ति मानी जाती है। आज की युवा पीढ़ी 12वीं शताब्दी के बाद उपयोग में आई अरबी-सिंधी लिपि से विमुख हो रही है। देवनागरी, सिंधी लिपि की ओर युवा पीढ़ी का रूझान बढ़ रहा है। भारतीय आर्य भाषाओं के भारत की एक प्रमुख साहित्यिक भाषा है। इसकी उत्पत्ति वेदों के लेखन या सम्भवत: उससे भी पहले सिंध क्षेत्र में बोली जाने वाली एक प्राचीन भारतीय-आर्य बोली से हुई है। ऋग्वेद के श्लोकों पर इस बोली का प्रभाव कुछ हद तक देखा जा सकता है। इसी लिपि और बोली के संरक्षण और बढ़ावा देने के लिए पाठक मंच कार्य करेगा। 

 कार्यक्रम में संजय अगनानी,  राम मोह्नानी, सुनील वाधवानी, नानक फुलवानी, अजय दुम्ब्वानी, अजय ढालवानी,  डॉ. हंसा दुम्ब्वानी, दीपा लाखवानी, दीपा तलरेजा, दिव्या पाहुजा, यश अगनानी सहित समाजजन उपस्थित थे। विजय गुनवानी ने सभी का आभार माना।

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