जामनेर में गंदगी के कारण अस्पतालों में मरीजों की भीड़ : पहचान के आधार पर रोज़गार ? | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

जामनेर में गंदगी के कारण अस्पतालों में मरीजों की भीड़ : पहचान के आधार पर रोज़गार ? | New India Times

जलगांव के जामनेर में नगर परिषद के आशीर्वाद से सारे प्राइवेट अस्पताल लाखों रुपए कमाने के लिए भरने शुरू हो गए हैं। मानसून आने के बाद नगर परिषद ने बिल निकालने के लिए जेसीबी चलाकर नाले साफ़ किए लेकिन कहीं भी मच्छर उन्मूलन कार्यक्रम नहीं चलाया। नगर परिषद के आरोग्य विभाग में वोट की पहचान के आधार पर संविदा कर्मी भर्ती कराए गए हैं। आम लोग शिकायत कर रहे हैं कि 70 करोड़ की लागत से बनाए भूमिगत ड्रेनेज सिस्टम के अंदर से तिलचट्टे और तमाम किस्म के कीड़े बाथरूम शौचालय के पाइप से सीधे घरों में घुस रहे हैं।

जामनेर में गंदगी के कारण अस्पतालों में मरीजों की भीड़ : पहचान के आधार पर रोज़गार ? | New India Times

कचरा संकलन के लिए घंटा गाड़ी घर तक आने के अलावा नगर परिषद की कोई उपलब्धि नहीं है। मंत्री गिरीश महाजन मेयर साधना महाजन के 32 साल के राज में जामनेर नगर परिषद अपनी मालकियत का एक अस्पताल और आंगनबाड़ी तक नहीं बना सकी है। तीन साल से जामनेर के सरकारी अस्पताल में प्रसुती विशेषज्ञ नहीं है। गंदगी के अंबार के चलते फैल रही संक्रामक बीमारियों से पीड़ित सैकड़ों परिवारों को बचत का पैसा अपनो के इलाज़ में फूंकना पड़ रहा है। न्यू इंडिया टाइम्स ने एक न्यूज़ रिपोर्ट में लिखा था कि 1995 से 2024 इन तीस साल के दौरान जामनेर ब्लॉक में सड़क निर्माण के नाम पर दो हज़ार करोड़ रुपए जमीन के नीचे दफना दिए गए।

सामाजिक कार्यकर्ता अविनाश बोरसे ने सुझाव दिया है कि ग्राम पंचायत की ग्राम सभा के तर्ज़ पर नगर परिषद द्वारा हर तीन महीने में एक बार खुली आम सभा होनी चाहिए। आम कर दाता नगर परिषद से मांग कर रहा है कि जामनेर शहर में व्यापक रूप से सार्वजनिक आरोग्य सतर्कता अभियान चलाया जाए। सदन में एनसीपी के चार पार्षद है नेता विपक्ष जावेद मुल्लाजी की मुखरता की लोग इस उम्मीद के साथ सराहना कर रहे हैं कि आरोग्य के मसले को लेकर वे सड़क पर उतरे।

पहचान के आधार पर रोज़गार ?
नगर परिषद में वोटर की पहचान के आधार पर संविदा कर्मी भर्ती कराए जाने का ट्रेंड अन्य ठिकानों पर भी देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक बताया गया कि वाघूर लिफ़्ट योजना के अधीन कृषि तालाबों का निर्माण कर रही तेलंगाना की GVPR कंपनी ने 10 संविदा कर्मचारी केवल इस बात से ख़फ़ा हो कर काम पर से निकाल दिए कि वो बीजेपी के समर्थक नहीं थे। जलगांव में ऐसे कई औद्योगिक यूनिट है जिनमें दक्षिणपंथी विचारधारा को स्पेस दिया जा रहा है। कितने युवकों को जर्मनी में रोज़गार मिला इसका डेटा हमारे पास नहीं है।

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