मक़सूद अली, ब्यूरो चीफ, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:

उमरखेड शहर के खंड क्रमांक 1 व 2 में कथित अनधिकृत लेआउट, भूखंड निर्माण-विक्रय, ग्रीन जोन एवं आरक्षण क्षेत्र में विकास तथा सरकारी जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच की मांग को लेकर सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता इरफान शेख ने राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को ज्ञापन सौंपा। मंत्री को यह ज्ञापन 28 सितंबर को उमरखेड दौरे के दौरान दिया गया।
ज्ञापन में वर्ष 2020 से खंड क्रमांक 1 व 2 में कथित अनधिकृत लेआउट, भूखंड निर्माण एवं बिक्री, जमीन के स्वीकृत उपयोग में कथित बदलाव तथा राजस्व और नगररचना नियमों के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों का उल्लेख किया गया है। इरफान शेख का दावा है कि कुछ मामलों में राजस्व कानून के तहत दंडात्मक कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन करीब 6.25 करोड़ रुपये की कथित दंड अथवा सरकारी बकाया राशि की पूरी वसूली अब तक नहीं हुई है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि संबंधित मामलों में निर्धारित दंड की वास्तविक राशि, अब तक हुई वसूली और शेष बकाया राशि की जांच की जाए। साथ ही 7/12 अभिलेखों में बकाया राशि की प्रविष्टि या बोझ दर्ज है अथवा नहीं, इसकी भी पड़ताल कराने की मांग की गई है।
इसी तरह ग्रीन जोन और आरक्षण क्षेत्र में कथित अनधिकृत प्लॉटिंग एवं विकास की जांच की मांग करते हुए विकास आराखड़े, जोन नक्शे, स्वीकृत लेआउट, विकास अनुमति और अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच कराने को कहा गया है। खंड क्रमांक 1 के सर्वे नंबर 139/1/ब से संबंधित 0.95 हेक्टेयर और 0.47.50 हेक्टेयर क्षेत्र की मौके पर जांच कराने की मांग भी ज्ञापन में की गई है।
ज्ञापन में सरकारी जमीन से जुड़े कथित लेन-देन, हस्तांतरण, प्लॉटिंग और उपयोग परिवर्तन की भी राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच की मांग की गई है। इसके अलावा राजस्व विभाग, नगर परिषद/नियोजन प्राधिकरण, नगररचना और भूमिअभिलेख विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर स्थल निरीक्षण, माप-जोख, पंचनामा और फोटोग्राफ सहित रिपोर्ट तैयार करने की मांग की गई है।
इरफान शेख ने कहा कि यदि जांच में अनधिकृत विकास, भूखंड बिक्री या सरकारी जमीन से संबंधित नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकारी बकाया की वसूली में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय करने की मांग की गई है।
हालांकि, ज्ञापन में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति आधिकारिक अभिलेखों, स्थल निरीक्षण और सक्षम प्राधिकरण की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

