फैज़ान खान, गुरुग्राम/नई दिल्ली, NIT:

वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान झज्जर की सड़कों पर प्रदर्शन और जाम लगाने के मामले में भीमसेना एवं संविधान सुरक्षा पार्टी (एसएसपी) के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष नवाब सतपाल तंवर ने बुधवार को एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मीनू की अदालत में सरेंडर किया। तंवर ने अदालत में जमानत याचिका दाखिल की, जिस पर सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें 70 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। साथ ही उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट भी रद्द कर दिए गए।
मामला वर्ष 2020 का है, जब गांव मातनहेल के एक परिवार ने न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। तंवर ने अदालत में कहा कि वह प्रदर्शन में शामिल नहीं थे और पुलिस ने उनका नाम मामले में शामिल किया है। उन्होंने दावा किया कि उनकी निजी जांच के अनुसार प्रदर्शन का मुख्य आयोजक झज्जर निवासी नवीन है, जो गुरुग्राम टेलीफोन एक्सचेंज में सरकारी कर्मचारी है। अदालत ने तंवर की ओर से दी गई इस जानकारी को रिकॉर्ड पर लिया।
तंवर ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सीआरपीसी की धारा 41ए के तहत नोटिस या अदालत का समन नहीं मिला था। उनकी गैर-मौजूदगी के चलते वर्ष 2023 में अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किए थे। पुलिस को उन्हें अदालत में पेश करने के निर्देश दिए गए थे। इसी बीच तंवर ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत के आदेश के बावजूद जांच अधिकारी के उपस्थित नहीं होने पर अदालत ने जुर्माना भी लगाया।
सरेंडर के दौरान तंवर अधिवक्ताओं, सहयोगियों, निजी सुरक्षाकर्मियों और हरियाणा पुलिस की सुरक्षा के बीच अदालत पहुंचे। उनकी कानूनी टीम में निशा तंवर, जितेंद्र कौशिक, साहस, सचिन, कुलदीप सिंह मलिक, रवि इंदौरा, अरुण कुमार और राकेश पुनिया समेत अन्य अधिवक्ता शामिल रहे। उनके साथ शिवानी तंवर, विवेक कुमार, दीवान सिंह और निकिता प्रजापत भी मौजूद रहे।
तंवर के अदालत पहुंचने की सूचना मिलते ही उनके समर्थक और कार्यकर्ता भी कोर्ट परिसर में पहुंच गए। जमानत मिलने के बाद समर्थकों ने मिठाइयां बांटकर खुशी जताई।

