सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विधायक सुनील उईके बोले: डॉ. मनमोहन सिंह पर लगे आरोप न्यायिक कसौटी पर नहीं टिके | New India Times

मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

जुन्नारदेव विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक सुनील उईके ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय डॉ. मनमोहन सिंह के विरुद्ध कोयला ब्लॉक आवंटन प्रकरण में आपराधिक कार्यवाही समाप्त किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला केवल एक व्यक्ति को न्याय मिलने का मामला नहीं है, बल्कि वर्षों तक सच पर झूठ और प्रचार की राजनीति करने वालों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है।

सुनील उईके ने कहा कि देश के सबसे ईमानदार, विद्वान और सादगीपूर्ण प्रधानमंत्रियों में से एक स्वर्गीय डॉ. मनमोहन सिंह को योजनाबद्ध तरीके से बदनाम किया गया। राजनीतिक लाभ के लिए उनके चरित्र पर संदेह पैदा किया गया, जबकि अब सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप न्यायिक कसौटी पर टिक नहीं सके।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मत है कि अन्ना आंदोलन के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता की भावनाओं के बीच ऐसा राजनीतिक माहौल बनाया गया, जिसमें तत्कालीन यूपीए सरकार और विशेष रूप से डॉ. मनमोहन सिंह को बिना किसी न्यायिक निष्कर्ष के ही कटघरे में खड़ा कर दिया गया। आंदोलन के कई चेहरे और उनके समर्थकों ने वर्षों तक इन आरोपों को अंतिम सत्य की तरह प्रस्तुत किया। अब सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वे लोग अपने आरोपों पर आत्ममंथन करेंगे और क्या स्वर्गीय डॉ. मनमोहन सिंह की स्मृति के प्रति नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करेंगे।

सुनील उईके ने कहा कि उस दौर में मीडिया के एक वर्ग ने भी टीआरपी और सनसनी की होड़ में आरोपों को इस तरह प्रसारित किया, मानो न्यायालय का फैसला पहले ही आ चुका हो। लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन जब पत्रकारिता की जगह आरोपों की प्रतिस्पर्धा ले लेती है, तब सबसे बड़ी कीमत किसी निर्दोष व्यक्ति की प्रतिष्ठा को चुकानी पड़ती है। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय उन सभी के लिए भी आईना है, जिन्होंने न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही डॉ. मनमोहन सिंह को दोषी की तरह प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस व्यक्ति ने भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, देश को वैश्विक पहचान दिलाई और अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी का उदाहरण प्रस्तुत किया, उसे अपने जीवनकाल में यह न्याय नहीं मिल सका। उनके निधन के बाद आया यह निर्णय इस बात का प्रमाण है कि सत्य देर से सही, लेकिन अंततः विजयी होता है।

सुनील उईके ने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी ईमानदार व्यक्ति की प्रतिष्ठा को झूठे नैरेटिव, आधे-अधूरे तथ्यों और राजनीतिक अभियानों के माध्यम से धूमिल करना लोकतंत्र के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने केवल एक मुकदमे का पटाक्षेप नहीं किया, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के महत्व को भी पुनः स्थापित किया है।

अंत में उन्होंने कहा कि स्वर्गीय डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए ईमानदारी, विनम्रता, संवैधानिक मर्यादा और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा रहेगा। कांग्रेस पार्टी उनके योगदान, सम्मान और सत्यनिष्ठा को नमन करती है तथा मानती है कि इतिहास अंततः सत्य के पक्ष में खड़ा होता है।

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