नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:
अभिजीत दीपके से बातचीत के बाद शरद पवार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिले फ़िर चंद घंटों में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा हो गया। गोदी मीडिया ने प्रधान के इस्तीफे को राष्ट्रवाद में लपेटकर अंधभक्तो के सामने परोस दिया। बीते 12 सालों में जनता द्वारा किए गए बड़े बड़े आंदोलनों को कोर्ट और पुलिस के स्तर पर कुचलने वाली मोदी सरकार का Gen – G के आगे घुटनों पर आ जाना कोई सामान्य बात नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में शरद पवार आते नज़र आ रहे हैं।

NCP में फिर से टूट की खबरों के बीच NDA खेमे के निकट पहुंचे पवार ने मोदी सरकार को अहंकार की धूल से सना आईना दिखाया। छात्रों द्वारा तानाशाह करार दिए गए नरेन्द्र मोदी ने अपनी इमेज़ सुधारने के प्रयास स्वरूप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रियता बढ़ा दी है। राहुल गांधी के बयानों ने जंतर मंतर से देश के कोने कोने में RSS के ख़िलाफ़ एक भयमुक्त समाज को खड़ा कर दिया है।
शरद पवार द्वारा की गई मध्यस्थता ने मोदी सरकार की अड़चने कुछ हद तक कम की है वही Gen G’s को नए आंदोलन के लिए बल दे दिया है। वैश्विक हालातों में पीट चुकी भारत की अर्थव्यवस्था को देखते हुए अगला इस्तीफ़ा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का हो सकता है। परिसीमन के लिए दो तिहाई बहुमत से संविधान संशोधन कर पाना अब मोदी सरकार के बस की बात नहीं रही है। अयोध्या में श्री राम जन्म भूमि ट्रस्ट क्षेत्र विकास में ट्रस्टियों द्वारा किए गए करोड़ों रुपए के चढ़ावा चोरी कांड के कारण जनता में गुस्सा है।

