रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बड़ोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं अवंतिका विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उज्जैन में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “आत्मनिर्भर भारत से विकसित भारत की ओर” में झाबुआ के शारदा समूह के विद्यालयों—वयम् गुरुकुलम, शारदा विद्या मंदिर एवं केशव इंटरनेशनल स्कूल—के विद्यार्थियों ने आत्मनिर्भर भारत की दिशा में किए जा रहे विभिन्न प्रयोगों एवं नवाचारों की प्रदर्शनी प्रस्तुत की।

प्रदर्शनी में रोबोटिक्स, कौशल विकास एवं नवाचार से जुड़े विद्यार्थियों के विभिन्न प्रोजेक्ट प्रदर्शित किए गए। विशेष रूप से विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई हाइब्रिड साइकिल आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। कार्यशाला में उपस्थित अतिथियों एवं देशभर से आए विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों के इस नवाचार की सराहना की।
शारदा समूह द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, कौशल विकास, नवाचार एवं स्थानीय संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी प्रदर्शनी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों ने अपने प्रोजेक्ट्स की जानकारी आगंतुकों को स्वयं देते हुए उनके कार्य एवं उपयोगिता के बारे में विस्तार से समझाया।
कार्यशाला के औपचारिक सत्र में शारदा समूह द्वारा आत्मनिर्भर भारत की दिशा में किए जा रहे प्रयोगों एवं प्रयासों पर मकरंद आचार्य ने प्रस्तुति दी। प्रस्तुति में विद्यार्थियों को केवल ज्ञान प्राप्त करने के बजाय उसे कौशल, नवाचार एवं वास्तविक जीवन के प्रयोगों से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव श्री अतुल जी कोठारी, न्यास के राष्ट्रीय सहसंयोजक एवं आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय संयोजक श्री ओम जी शर्मा, अवंतिका विश्वविद्यालय के कुलगुरु श्री नितिन राणे तथा विक्रम विश्वविद्यालय के कुलगुरु श्री अर्पण भारद्वाज सहित अनेक शिक्षाविद् एवं विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
प्रदर्शनी में अंबिका टवली एवं पवनेंद्र सिसोदिया के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों विभोर मोदी, अनय पोरवाल, रुद्र पवार, दीप राज, सुप्रिया डामोर एवं प्रिया डामोर ने सहभागिता करते हुए अपने नवाचार प्रस्तुत किए।
राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में झाबुआ के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए नवाचारों एवं प्रयोगों को मिली सराहना ने यह संदेश दिया कि छोटे शहरों और जनजातीय अंचलों के विद्यार्थी भी नवाचार, कौशल विकास एवं आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

