मेनका गांधी के पिच्छी संबंधी बयान पर जैन समाज में नाराजगी, डॉ. अनिल जैन ने सार्वजनिक माफी की मांग की | New India Times

विवेक जैन, बागपत (यूपी), NIT:

जनपद बागपत के प्रसिद्ध होम्योपैथ चिकित्सक एवं समाजसेवी डॉ. अनिल जैन (पीएनबी वाले) ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी द्वारा जैन मुनियों की पिच्छी को लेकर दिए गए बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है।

उन्होंने कहा कि मेनका गांधी का पशु-पक्षियों और बेजुबान जीवों के प्रति प्रेम एवं सेवा पूरे देश में सम्मान की दृष्टि से देखी जाती है, लेकिन जैन मुनियों की पिच्छी के संबंध में दिया गया उनका बयान तथ्यों पर आधारित नहीं है। उन्होंने कहा कि मेनका गांधी ने यह दावा किया था कि जैन मुनियों की पिच्छी की मांग पूरी करने के लिए बड़े पैमाने पर मोरों का शिकार किया जाता है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।

डॉ. अनिल जैन ने कहा कि जैन धर्म अहिंसा के सिद्धांत पर आधारित है और किसी भी जीव को कष्ट पहुंचाना या उसकी हत्या करना जैन धर्म की मूल भावना के विरुद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैन मुनियों द्वारा उपयोग की जाने वाली पिच्छी के निर्माण के लिए किसी भी मोर की हत्या नहीं की जाती।

उन्होंने बताया कि वर्षा ऋतु के दौरान मोर स्वाभाविक रूप से अपने पंख छोड़ देते हैं। जैन समाज उन्हीं गिरे हुए पंखों को एकत्रित कर उनसे पिच्छी तैयार करता है। इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की हिंसा या जीव को नुकसान नहीं पहुंचाया जाता।

डॉ. अनिल जैन ने कहा कि मेनका गांधी का यह बयान पर्याप्त तथ्यों की जानकारी के अभाव में दिया गया प्रतीत होता है। उन्होंने मांग की कि मेनका गांधी अपना बयान वापस लें तथा जैन समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक परंपरा या समुदाय के बारे में टिप्पणी करने से पहले उसके तथ्यों और परंपराओं की सही जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है, ताकि समाज में अनावश्यक भ्रम और विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

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