मोहम्मद इसहाक मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:
मऊगंज जिले के खटखरी बाजार में सड़क हादसे के बाद न्याय की मांग को लेकर ग्रामीणों द्वारा किए गए हाईवे जाम की कवरेज के दौरान पत्रकारों और थाना प्रभारी के बीच विवाद का मामला सामने आया है। पत्रकारों ने मऊगंज थाना प्रभारी राम सिंह पर कवरेज में बाधा डालने, अभद्र व्यवहार करने और मुकदमा दर्ज करने की कथित धमकी देने के आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर नाराज पत्रकार सोमवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शशिकांत सरयाम को लिखित ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच एवं कार्रवाई की मांग की।
हादसे की खबर की कवरेज को लेकर हुआ विवाद
पत्रकारों के अनुसार, रविवार रात खटखरी बाजार में हुए सड़क हादसे में एक युवती की मौत के बाद परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए थे। न्याय की मांग को लेकर ग्रामीणों ने हाईवे पर जाम लगा दिया था। मौके पर तनावपूर्ण स्थिति और बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच पत्रकार प्रद्युम्न शुक्ला, अमर मिश्रा, सुनील पांडे, विनोद सिंह और दीपक सिंह घटना की वीडियो कवरेज कर रहे थे।
पत्रकारों का आरोप है कि इसी दौरान थाना प्रभारी राम सिंह ने उन्हें कवरेज करने से रोकने का प्रयास किया और मौके से हटने के लिए कहा। पत्रकारों के मुताबिक, विरोध करने पर थाना प्रभारी ने कथित तौर पर धमकी देते हुए कहा, “मेरी नजर में एक बार चढ़ गया तो उतरता नहीं, FIR जरूर करूंगा।”
हालांकि, इन आरोपों पर थाना प्रभारी या पुलिस प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पत्रकारों ने कहा- दबाव में नहीं झुकेंगे
पत्रकारों का कहना है कि उनका काम घटनास्थल की वास्तविक स्थिति को जनता तक पहुंचाना है। उनका दावा है कि वे न तो पुलिस की कार्रवाई में बाधा डाल रहे थे और न ही कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास कर रहे थे। वे केवल सड़क हादसे, ग्रामीणों के विरोध और मौके की स्थिति की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे।
पत्रकारों ने कहा कि यदि कवरेज के दौरान पत्रकारों पर कथित रूप से दबाव बनाया जाता है या धमकी दी जाती है, तो यह पत्रकारिता की स्वतंत्रता और जनता तक सही सूचना पहुंचाने के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय है।
तीन दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो सांकेतिक विरोध की चेतावनी
ज्ञापन में पत्रकारों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर थाना प्रभारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है। पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिवस के भीतर मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों की कवरेज के दौरान हाथों पर काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराया जाएगा।
SP की कार्रवाई पर टिकी नजरें
मामला अब पत्रकारों और पुलिस के बीच कथित विवाद से आगे बढ़कर स्वतंत्र एवं निर्भीक पत्रकारिता से जुड़े सवाल के रूप में सामने आया है। पत्रकारों ने कहा कि वे किसी अधिकारी से टकराव नहीं चाहते, लेकिन कवरेज के दौरान कथित धमकी या दबाव को स्वीकार नहीं करेंगे।
अब पत्रकारों की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक स्तर से क्या कार्रवाई की जाती है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर जिले के पत्रकारों की नजरें टिकी हुई हैं।

