म.प्र. हाईकोर्ट ने तृतीय एडीजे महू का आदेश किया निरस्त, केस अन्य सक्षम न्यायालय में स्थानांतरित करने के निर्देश | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

माननीय म.प्र. हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने दिनांक 15.04.2025 को महू (डॉ. अंबेडकर नगर) न्यायालय में लंबित एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी किए। बुरहानपुर के एक पक्षकार की कंपनी “रोज-लाइफ” द्वारा महू (वर्तमान नाम डॉ. अंबेडकर नगर) के एक व्यापारी के विरुद्ध बंगला नंबर 91 के विक्रय-पत्र को शून्य घोषित कराने हेतु तृतीय एडीजे न्यायालय महू (डॉ. अंबेडकर नगर) में एक प्रकरण प्रस्तुत किया गया था, जो लंबित था।

उक्त प्रकरण में वादी की ओर से पैरवी कर रहे बुरहानपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मनोज कुमार अग्रवाल ने माननीय तृतीय एडीजे न्यायालय द्वारा पारित आदेश को माननीय हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर माननीय हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी किया।

इस फैसले में माननीय हाईकोर्ट ने तृतीय एडीजे न्यायालय (डॉ. अंबेडकर नगर/महू) द्वारा पारित आदेश दिनांक 30.07.2025 को न केवल निरस्त कर दिया, बल्कि उक्त न्यायालय (तृतीय एडीजे) से प्रकरण की फाइल वापस लेकर उसे अन्य सक्षम न्यायालय में अंतरित किए जाने के निर्देश भी माननीय जिला न्यायाधीश इंदौर को जारी किए।

उक्त जानकारी देते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्री मनोज कुमार अग्रवाल (बुरहानपुर) ने बताया कि माननीय हाईकोर्ट ने उन प्रतिवादियों (कुल 5 में से 4 प्रतिवादी) के जवाब (W.S.) को भी प्रकरण के अभिलेख से हटाने के आदेश जारी किए, जिनके जवाब वैधानिक समय सीमा समाप्त होने के बाद भी अभिलेख पर लेने के आदेश तृतीय एडीजे न्यायालय द्वारा दिए गए थे।

विधि के क्षेत्र में माननीय मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला सिविल लिटिगेशन के मामलों में मील का पत्थर साबित होगा, जो न्यायिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं अभूतपूर्व निर्णय माना जा रहा है। यह बात अधिवक्ता श्री मनोज कुमार अग्रवाल ने कही।

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