मक़सूद अली, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:

वर्धा–यवतमाल–नांदेड़ रेलवे परियोजना से जुड़े अवैध गौण खनिज उत्खनन मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। विधानसभा उपाध्यक्ष अण्णा बनसोडे के आदेश के बाद यवतमाल तहसील में की गई ETS (ईटीएस) मापनी की आंशिक रिपोर्ट सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, मौजे कारली से मौजे गोधनी तक 17 किलोमीटर क्षेत्र में लगभग 8,90,506.91 ब्रास गौण खनिज का उत्खनन हुआ है। यदि इसका मूल्य 700 रुपये प्रति ब्रास के हिसाब से लगाया जाए, तो कुल कीमत लगभग 62 करोड़ 33 लाख रुपये से अधिक बैठती है। हालांकि, शिकायतकर्ता अमोल कोमावार का आरोप है कि यह रिपोर्ट केवल अनुमान पर आधारित है और वास्तविक उत्खनन इससे कहीं अधिक हो सकता है।
बताया जा रहा है कि चापर्डा से तिवसा तक कुल 33 किलोमीटर क्षेत्र की मापनी की जानी है, जिसमें फिलहाल केवल 17 किलोमीटर का ही सर्वे पूरा हुआ है। यह मापनी केवल रेलवे ट्रैक के दायरे में किए गए उत्खनन की है, जबकि आसपास के क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर खनन होने की बात सामने आ रही है।
इस मामले में 27 अगस्त 2020 से लगातार शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने इसे दबाने की कोशिश की। शिकायतकर्ता का कहना है कि करोड़ों रुपये का यह घोटाला अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ और लंबे समय तक इसे नजरअंदाज किया गया।
कळंब तहसील में पहले 117 करोड़ रुपये के उत्खनन का अनुमान लगाया गया था, लेकिन अब वहां रेलवे ट्रैक बिछ जाने के कारण मापनी संभव नहीं है। वहीं, कळंब के घोटी-चापर्डा क्षेत्र में 23 करोड़ रुपये और उमरखेड तहसील में करीब 40 करोड़ रुपये के अवैध उत्खनन का मामला भी सामने आया है।
विशेषज्ञों और आधुनिक उपकरणों की कमी के कारण मापनी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। अमोल कोमावार ने बताया कि वे इस मामले को लेकर राज्य के महसूल मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे से मुलाकात कर उच्च स्तरीय जांच और आधुनिक तकनीक से पुनः मापनी की मांग करेंगे।
मापनी प्रक्रिया पर सवाल:
रिपोर्ट में कहा गया है कि मूल भूमि स्तर (OGL) की जानकारी उपलब्ध नहीं होने और कई स्थानों पर पानी भर जाने के कारण औसत माप लेकर अनुमानित गणना की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इतनी बड़ी राशि के मामले में केवल औसत माप लेना गंभीर लापरवाही है, जिससे वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पा रही है।
