मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:
देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल NEET परीक्षा में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने पूरे शिक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि किसी परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित नहीं रखा जा सकता, तो लाखों विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत, माता-पिता के त्याग और समाज के विश्वास का क्या महत्व रह जाएगा।
हाल ही में सामने आए पेपर लीक प्रकरण और परीक्षा रद्द होने की आशंका ने लाखों विद्यार्थियों को मानसिक तनाव, असुरक्षा और निराशा में धकेल दिया है। यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2024 में भी इसी प्रकार की घटनाओं ने देशभर में चिंता बढ़ाई थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि शिक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही, भ्रष्टाचार और संगठित अनियमितताएं मौजूद हैं।
आज शिक्षा केवल ज्ञान का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि एक बड़ा व्यवसाय बनती जा रही है। माता-पिता अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज तक लेते हैं। कोई मजदूरी करता है, कोई खेती बेचता है, तो कोई अपनी जरूरतों में कटौती कर बच्चों के सपनों को पूरा करने का प्रयास करता है। ऐसे में जब परीक्षा प्रक्रिया ही संदिग्ध हो जाए, तब सबसे बड़ा आघात उन परिवारों को पहुंचता है जिन्होंने अपने बच्चों के भविष्य के लिए सब कुछ दांव पर लगाया होता है।
एक विद्यार्थी वर्षों तक दिन-रात मेहनत करता है। वह सामाजिक जीवन से दूर रहकर केवल अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहता है। कई विद्यार्थी मानसिक दबाव, अवसाद और असफलता के भय से जूझते हैं। दूसरी ओर माता-पिता पर फीस, कोचिंग, रहने-खाने और अन्य खर्चों का भारी दबाव रहता है। ऐसे में यदि कुछ लोग पैसों और भ्रष्ट तंत्र के बल पर पेपर लीक कर पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करें, तो यह केवल अपराध नहीं बल्कि लाखों सपनों के साथ विश्वासघात है।
पालक महासंघ जिला इकाई बुरहानपुर के अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनी ने इस पूरे मामले में गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों में शामिल दोषियों पर कठोर और त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए। केवल छोटे स्तर के लोगों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि इस पूरे नेटवर्क से जुड़े हर व्यक्ति — चाहे वह प्रशासनिक अधिकारी हो, परीक्षा एजेंसी से जुड़ा व्यक्ति हो या दलाल तंत्र — सभी को कानून के तहत सख्त सजा दी जानी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि जिन विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा देने के लिए दूसरे शहरों या परीक्षा केंद्रों तक जाना पड़ेगा, उनके यात्रा भत्ते, आने-जाने का खर्च और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का वहन सरकार द्वारा किया जाए। बार-बार परीक्षा आयोजित होने से विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है, जबकि वे पहले से ही भारी दबाव में जीवन यापन कर रहे हैं।
साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तकनीकी रूप से सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता बताई गई। परीक्षा केंद्रों की निगरानी, डिजिटल सुरक्षा, प्रश्नपत्र वितरण प्रणाली और जांच प्रक्रिया को मजबूत करना समय की मांग है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होता है। यदि युवाओं का विश्वास शिक्षा व्यवस्था से उठ गया, तो यह केवल एक परीक्षा का संकट नहीं रहेगा, बल्कि देश के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन जाएगा। इसलिए अब समय आ गया है कि सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को पुनः स्थापित करें और विद्यार्थियों के सपनों की रक्षा करें।
इस दौरान धर्मेंद्र सोनी, राजीव खेड़कर, मंसूर सेवक, सरिता राजेश भगत, परेश शाह, पंकज पटेल, अता उल्लाह खान, डॉ. युसूफ खान, बसंत पाल, रियाज़-उल-हक अंसारी, विनय पुनीवाला, इकबाल अंसारी, नंदकिशोर वाणे, राजिक हुसैन, राजकुमार बचवानी, देवचरण शर्मा, विजय राठौड़, राजेश भगत और विवेक हकीम सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

