रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

रमज़ान के पाक और मुक़द्दस महीने में बड़ों के साथ-साथ मासूम बच्चे भी रोज़ा रखकर इबादत में मशगूल नजर आ रहे हैं। मुस्लिम बस्तियों में रौनक है और मस्जिदों में नमाज़ियों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

माहे रमज़ान के रहमतों और बरकतों वाले इस पवित्र महीने में रोज़े, नमाज़ और कुरान की तिलावत का सिलसिला लगातार जारी है। इसी क्रम में समाज के मासूम बच्चे भी रोज़ा रखकर खुदा की इबादत में जुटे हुए हैं।

नन्हें-मुन्ने मासूम बच्चों ने अल्लाह और उसके रसूल की रज़ा हासिल करने के लिए भूख-प्यास की शिद्दत बर्दाश्त करते हुए रोज़ा रखा। बच्चों से जब रोज़ा, नमाज़ और तरावीह के बारे में चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि उनके पूरे रोज़े चल रहे हैं और आगे भी इंशाल्लाह पूरे रोज़े रखेंगे।

अतीफ खान (उम्र 4 वर्ष), वालिद अतिक खान; अतिया शेरानी (उम्र 9 वर्ष), वालिद इरशाद शेरानी, शेरानीपुरा मेघनगर; मोहम्मद मुबिन मकरानी (उम्र 7 वर्ष), वालिद वसीम मकरानी; मोहम्मद अर्श (उम्र 10 वर्ष), वालिद वसीम खान, नयापुरा मेघनगर—इन सभी बच्चों ने रोज़ा रखने के साथ-साथ मस्जिद जाकर पाँचों वक्त की नमाज़ अदा की और घर पर कुरान की तिलावत भी की।
बच्चों के रोज़ा रखने और तिलावत करने पर रिश्तेदारों और समाज के लोगों ने उनका हौसला बढ़ाने के लिए उन्हें तोहफे भी दिए।
बच्चों के रोज़ा रखने पर घरों में खास पकवान बनाए गए। बच्चों ने अपनी ज़िंदगी का पहला रोज़ा खुदा और उसके रसूल की खुशी के लिए रखा। नमाज़ पढ़ने के साथ-साथ शाम को रोज़ा इफ्तार के दौरान बच्चों ने अपने मनपसंद लज़ीज़ खाने का लुत्फ उठाया।
माता-पिता ने भी बच्चों की पसंद का पूरा ख्याल रखते हुए उनके लिए स्वादिष्ट और विशेष पकवान तैयार किए।

