अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:
अखिल भारत शिक्षा अधिकार मंच एवं समान शिक्षा आंदोलन उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में प्रयागराज के सोहबतियाबाग स्थित संत रविदास मंदिर सभागार में “समान शिक्षा की जरूरत और वर्तमान चुनौतियां” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के प्रोफेसर विकास गुप्ता, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रम हरिजन, काशी विद्यापीठ के पूर्व प्रोफेसर एवं समान शिक्षा आंदोलन के संयोजक प्रो. महेश विक्रम सहित शहर के प्रबुद्धजन और नागरिक समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता प्रोफेसर विकास गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा का निजीकरण किया जा रहा है और इसे कॉर्पोरेट के भरोसे छोड़ा जा रहा है। इसका दुष्परिणाम वंचित तबकों पर पड़ेगा और इससे देश में सामाजिक व आर्थिक असमानता की खाई और गहरी होगी।
प्रोफेसर महेश विक्रम ने कहा कि समान शिक्षा की आवश्यकता को समाज के बीच ले जाना होगा। जब तक इस मुद्दे पर व्यापक जनआंदोलन नहीं होगा, तब तक सरकारें इसे लागू करने के लिए बाध्य नहीं होंगी।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रम हरिजन ने कहा कि वर्तमान चुनौतियों को देखते हुए सभी को एकजुट होकर शिक्षा के सवाल पर संगठित आंदोलन करना होगा। जब समाज आंदोलित होगा, तभी राजसत्ता का रुख शिक्षा के प्रति बदलेगा।
नागरिक समाज की ओर से वक्तव्य रखते हुए पदम सिंह ने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था सामुदायिक जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों का क्षरण कर रही है, जिसके कारण समाज की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। इसका समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
कार्यक्रम की शुरुआत दिशा संगठन के साथियों द्वारा गीत प्रस्तुति से हुई। कार्यक्रम का संचालन इंकलाब छात्र मोर्चा के रामचंद्र ने किया। कार्यक्रम का समापन अखिल भारत समान शिक्षा अधिकार मंच इलाहाबाद के संयोजक एवं आइसा प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
इस अवसर पर छात्रों ने समान शिक्षा की आवश्यकता और वर्तमान चुनौतियों को लेकर सवाल भी पूछे। कार्यक्रम में अनुपम कुमार, सुधीर, सौम्या, डॉ. कलाम, अमित मनोज, चंद्रप्रकाश सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

