नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

नरेन्द्र मोदी सरकार के संरक्षण में बीजेपी को महाराष्ट्र की सत्ता मे बने रहना पड़ेगा अगर सत्ता गई तो दक्षिणपंथी विचार ख़त्म होते देर नहीं लगेगी। हजारों करोड़ रुपए की अनाम प्रॉपर्टी इकठ्ठा कर चुके कई नेता दस साल के शासन में अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक भी ठोस विकास का काम नहीं कर सके हैं।वोट चोरी पकड़े जाने के बाद NDA के लिए निकाय के आम चुनाव गले की हड्डी बन चुके हैं।

मंत्री गिरीश महाजन की एकाधिकारीता से सतर्क शिवसेना एकनाथ शिंदे के विधायक किशोर पाटिल ने आगामी निकाय चुनाव आत्मबल पर लड़ने की घोषणा कर दी है। शिवसेना (ES) जलगांव जिले में स्वतंत्र रूप से निकाय चुनाव मैदान में हो सकती है।जलगांव मनपा जिला परिषद के लिए सुरेश जैन और एकनाथ खडसे का तालमेल बनने जा रहा है।
गिरीश महाजन के गृह नगर जामनेर की बात करे तो विपक्ष की निष्क्रियता का लाभ उठाकर बीजेपी इनकमिंग के चिराग़ को बार बार लगातार घिसकर चमत्कार का आसार पैदा कर रही है। नेरी के दिनकर पाटिल (आबा) ने NCP (SP) को त्याग कर बीजेपी ज्वाइन कर ली है।विधानसभा चुनाव में दिलीप खोड़पे की उम्मीदवारी के तर्ज़ पर विपक्ष किसी नए चेहरे के दम पर जामनेर नगर परिषद का चुनाव लड़ सकता है। जानकारी के अनुसार गठबंधन की ओर से बीजेपी के पुराने दिवंगत नेता की पत्नी को मैदान में उतारने की रणनीती अपनाई जा सकती है।
परिवारवाद के आरोप के चलते मंत्री गिरीश महाजन अपनी पत्नी साधना महाजन को नगर अध्यक्ष पद के लिए रिपीट करेंगे इसकी संभावना कम है। जलगांव जिले की राजनीति में बीजेपी बनाम सर्व दलीय एकता के विचार को जनभावना द्वारा बल मिल रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद सियासत की गोद में छिपा हुआ भविष्य सार्वजनिक होगा बशर्ते आप पाठक लोकतंत्र पर विश्वास रखने वाले नागरिक होने के नाते मोदी सरकार की विदेश नीति पर नजर बनाए रखे।
