आलम वारसी, ब्यूरो चीफ, मुरादाबाद (यूपी), NIT:

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास को देखें तो उन्होंने वन में बिताए समय से लेकर घर वापसी तक समाज के लिए अनेक संदेश दिए। एक पुत्र के रूप में उन्होंने पिता के हर आदेश का पालन किया। उनकी वेशभूषा सरल रही और उन्होंने किसी राजभोग का आनंद नहीं लिया। रावण के विरुद्ध उन्होंने नैतिकता की लड़ाई लड़ी और हर आचरण से सामाजिक मूल्यों का संदेश दिया।
सिद्ध कल्चर फाउंडेशन की ओर से पीएसी स्थित सिद्ध ग्लोबल तिकोना पार्क में 18 अक्टूबर को दो दिवसीय लेजर शो का आयोजन किया गया, जिसमें संगीत के साथ रामायण, महाआरती और आतिशबाजी के दिव्य दृश्य देखने को मिले। जय श्रीराम के उद्घोष के बीच रंग-बिरंगी लेजर लाइटों से सजी रामायण की झलकियां दिखाई गईं। दिल्ली की टीम ने संवादों के साथ सम्पूर्ण रामायण को प्रस्तुत किया। शो देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नागरिक पहुंचे।
कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना, भगवान शिव की स्तुति, नृत्य, और भगवान श्रीराम के भजन से हुई। पूरे पार्क में लेजर लाइटों और धुएं के प्रभाव से सारा वातावरण भक्तिमय हो उठा।2021 से निरंतर हो रहा आयोजनसिद्ध कल्चरल फाउंडेशन द्वारा 2021 से यह लेजर शो आयोजित किया जा रहा है। दीपावली के उल्लास को बढ़ाने हेतु धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों तथा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को इस शो के माध्यम से प्रसारित किया जाता है। आतिशबाजी का नज़ारा भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया।
मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने शो की सराहना करते हुए कहा कि “सांस्कृतिक विरासत को संजोने के लिए ऐसे आयोजन आवश्यक हैं। ”डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ एवं निदेशक, सिद्ध कल्चर फाउंडेशन ने कहा —“मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम सांस्कृतिक मूल्यों के धरोहर हैं। दीपावली उनके वनवास से लौटने का प्रतीक पर्व है। भगवान श्रीराम ने पिता के आदेश का अक्षरशः पालन कर समाज में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
