अशफ़ाक़ क़ायमखानी, ब्यूरो चीफ, जयपुर (राजस्थान), NIT:

राजस्थान में मुस्लिम समुदाय द्वारा सामाजिक तौर पर संचालित शैक्षणिक संस्थानों में से एक प्रमुख शिक्षण संस्थान इस्लामिया स्कूल/कालेज सीकर की प्रबंध समिति के हुए चुनाव में सदस्यता के लिये व्यक्तिगत तौर पर स्वयं के आवेदन लेने व जमा कराने के बाद मतदाता पहचान पत्र लेने एवं फिर आकर मतदान करने तक एक हजार से अधिक महिलाओं का संस्थान परिसर में कम से कम चार दफा आने से भव्य स्कूल भवन व उसमें बहुत ही नियमानुसार फर्नीचर, साफ सफाई व काबिल स्टाफ देखकर उनका दिल बाग-बाग होना देखा गया।

अधीकांश महिलाओं ने तो चुनाव के बहाने अपने जीवन में पहली दफा परिसर में कदम रखा जहां सुविधाओं व व्यवस्थाओं एवं स्टाफ की आत्मीयता को देखकर वो काफी प्रफूल्लित नज़र आ रही थीं।
हालांकि कुछ अर्से से 16 चुनाव के मार्फत निदेशक चुनकर आते हैं जिनमें 6 महिलाओं का प्रतिनिधित्व होता है लेकिन इस दफा हुई चुनावी प्रक्रिया से आम महिलाओं का सदस्य बनकर मतदान में भाग लेने से संस्था के प्रति जुड़ाव होने से उक्त शिक्षण संस्थान की चर्चा हर घर के आंगन व चूल्हे तक होने लगी है।

प्रबंध समिति के लिये मतदान के मार्फत कौन चुने गये यह खास बात नहीं है बल्कि चुनाव अधिकारी सेवानिवृत्त अतिरिक्त चीफ इंजीनियर AVVNL खुर्शीद हुसैन द्वारा निष्पक्ष व शानदार चुनावी प्रक्रिया व इंतजाम आम विधानसभा व लोकसभा से बेहतर ढंग से करने से महिलाओं ने आराम से भारी संख्या में मतदान किया है। कुल 15 बूथ में से 3 बूथ महिलाओं के लिये अलग से परिसर में ही बनाई गई थी जहां प्रत्येक मतदाता का मतदान करने के लिये आने व जाने का रास्ता अलग अलग था जिससे भीड़ जमा नहीं हो पाई। खासतौर पर बात यह भी है कि करीब 19 घंटे लगातार चली मतगणना में महिला उम्मीदवारों व महिला स्टाफ ने गम्भीरता से अपनी भागीदारी निभाई।
कुल मिलाकर यह है कि संस्था के कुल 5257 मतदाताओं में से 4695 मतदाताओं ने मतदान में भाग लिया। जिसमें महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों के मुकाबले अधिक था। महिलाओं का चुनावी प्रक्रिया में इस तरस भाग लेने से उक्त चुनाव की चर्चा हर घर के आंगन व चूल्हे तक होने लगी है। इस प्रक्रिया से आम मुसलमान का संस्था से जुड़ाव अधिक बढा है। चुनाव परिणाम में हाजी अनवार अहमद बशीर अहम कुरेशी के नेतृत्व वाला पैनल विजयी रहा।जबकि दोनों ही पैनलों व पैनल से अलग चुनाव लड़ रहे अनेक उम्मीदवार काफी काबलियत वाले थे। मतदाताओं ने जो फैसला सुनाया उसे सभी ने स्वीकार किया।

