शिवकुमार सिंह किसान हितैषी संस्था की हाईकोर्ट में हुई जीत, हाई कोर्ट ने दिया स्टे, कोर्ट की मंशा है कि कलेक्टर को चार्ज किया जावे | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

शिवकुमार सिंह किसान हितैषी संस्था की हाईकोर्ट में हुई जीत, हाई कोर्ट ने दिया स्टे, कोर्ट की मंशा है कि कलेक्टर को चार्ज किया जावे | New India Times

निमाड़ जिले के दिवंगत क़द्दावर नेता, जननायक स्वर्गीय ठाकुर शिवकुमार सिंह ने अपने ज़िले के किसानों की आर्थिक स्थिति को मज़बूत बनाने के लिए नवल सिंह सहकारी शक्कर कारखाना की स्थापना की थी। और इसके लिए उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी से भी टक्कर लेकर अपना त्यागपत्र इस कारखाने की स्थापना के लिए दे दिया था। इस कारखाने को उनके परिवार के सदस्यों द्वारा संचालित किया जा रहा है। लेकिन राजनीति के चलते कतिपय राजनेताओं द्वारा इस कारखाने को सियासी नज़र लगाई जा रही है। इस से जुड़े किसानों को आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए ठाकुर शिव कुमार सिंह किसान हितैषी समिति का गठन किया गया है। नवलसिंह सहकारी शक्कर कारखाना मर्यादित नवल नगर झिरी जिला बुरहानपुर शिव कुमार सिंह किसान हितैषी समिति के सदस्यों के द्वारा माननीय जबलपुर हाईकोर्ट में गन्ना फैक्ट्री के संबंध में एक याचिका दायर की थी।

जिसमें उन्होंने अपनी मुख्य बात रखी थी कि तत्कालीन कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल को संयुक्त पंजीयक इंदौर (जेआर) श्री मकवाना और नवल सिंह कारखाना के तत्कालीन प्रबंध संचालक द्वारा एक मतदाता सूची दी गई। कलेक्टर ने कहा कि सभी सही है न ? तो अफसर द्वारा आश्वासन दिया गया की पूरी सूची सही है जिस पर तत्कालीन कलेक्टर भव्या मित्तल ने साइन कर दी थी। जिसके बाद पता चला कि यह मतदाता सूची गलत तरीके से बनी है। जिस पर उन्होंने अपने अधिकारियों से जांच करवाई। जांच में भी त्रुटियां पाई गई। जिसके बाद कलेक्टर ने डिप्टी कलेक्टर और तहसीलदारों को जांच करने के निर्देश दिए। जांच में त्रुटियां पाई गई। कलेक्टर ने नाराज होते हुए मतदाता सूची में त्रुटियां मिलने पर अपने अधिकारियों से सही मतदाता सूची तैयार करवाई। और उस समय के तत्कालीन प्रबंध संचालक और जे आर इंदौर बीएल मकवाना के खिलाफ नाराज़गी जताते हुए तत्कालीन कलेक्टर भव्या मित्तल ने एक शिकायती पत्र निर्वाचन प्राधिकरण को दिया जिस में उन्होंने मांग की इन पर कार्यवाही की जाए ? और उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले दो अधिकारी रमेश चंद्र वारंगे और गौरव पटेल को तत्काल स्पेंड कर दिया।

उसके बाद दावे आपत्ति बुलाई गई जिसमें निर्वाचन अधिकारी को यह जांच करना थी कि नाम सही है या गलत है या लिंग महिला है या पुरुष है या कोई पात्र है या नहीं  ?  पात्र है या किसी का नाम छूट गया है तो उसको सम्मिलित करना था ?  लेकिन निर्वाचन अधिकारी द्वारा बिना किसी यह प्रक्रिया पूरी किए बिना अपने मन मर्जी से ही उसमें फेरबदल कर दिया। उसके बाद समिति ने दो लोगों के खिलाफ़ जबलपुर हाईकोर्ट में पिटीशन दायर की।एक महीने बाद बीएल मकवाना को प्रशासक का चार्ज दे दिया। जबकि चार्ज कलेक्टर को देना था जिस में साफ हो रहा था कि यह हमेशा की तरह चुनाव प्रभावित करवाना चाह रहे हैं ?  शिव कुमार सिंह किसान हितैषी समिति के सदस्यों को यह मंजूर नहीं था।

शिव भैया द्वारा बनाई गई इस संस्था पर हमला भी था जिसको लेकर एक और पिटीशन दायर की गई। जिसमें यह कहा गया कि जिस व्यक्ति पर लगातार जांच चली आ रही है। जिस व्यक्ति पर कोर्ट के आदेश के उल्लंघन का केस चल रहा है। जिस के खिलाफ कलेक्टर ने कार्रवाई का लेटर लिखा हुआ है। लेकिन चलती हुई चुनाव प्रक्रिया के बीच इस व्यक्ति को कैसे इस प्रशासक के पद पर बैठा दिया गया है। जिसको कोर्ट ने सही मानते हुए शिवकुमार सिंह किसान हितैषी समिति के पक्ष में फैसला सुनते हुए स्टे दे दिया। कोर्ट के आदेश की मंशा यह है कि कलेक्टर को चार्ज दिया जाए। जिस से किसानों की जीत हुई है।

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