मण्डलायुक्त ने परिषदीय विद्यालयों में आधार कार्ड के लिए जन्म प्रमाण पत्र और मिड डे मील योजना की समीक्षा की | New India Times

शरीफ़ अहमद खान, ब्यूरो चीफ, सोनभद्र (यूपी), NIT:

मण्डलायुक्त ने परिषदीय विद्यालयों में आधार कार्ड के लिए जन्म प्रमाण पत्र और मिड डे मील योजना की समीक्षा की | New India Times

परिषदीय विद्यालयों के बच्चों का आधार कार्ड बनाने हेतु जन्म प्रमाण-पत्र जारी करने में आ रही समस्या को लेकर मण्डलायुक्त ने की समीक्षा बैठक। मण्डलायुक्त ने जन्म प्रमाण-पत्र से जुड़े सम्बन्धित अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित कर जन्म प्रमाण-पत्र जारी करने के दिये निर्देश। आयुक्त विंध्याचल मण्डल मीरजापुर डॉ मुथुकुमार स्वामी बी ने सर्किट हाउस सोनभद्र में परिषदीय विद्यालयों में मिड डे मील योजना के तहत बच्चों को बेहतर मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने व बच्चों के आधार कार्ड बनाने हेतु जन्म प्रमाण पत्र जारी करने में हो रही देरी के सम्बन्ध में सम्बन्धित अधिकारियों के साथ बैठक की।

उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिये कि परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को मीनू के अनुरूप गुणवत्तायुक्त भोजन उपलब्ध कराया जाये और उनके पठन-पाठन के कार्य को बेहतर बनाया जाये। मण्डलायुक्त ने विद्यालयों के बच्चों के आधार कार्ड बनाने में जन्म प्रमाण-पत्र की आ रही समस्या के बारे में समीक्षा की, तो उप जिलाधिकारी द्वारा बताया गया ब्लाक स्तर पर समय से रिपोर्ट आख्या उपलब्ध नहीं हो पाती है, जिस पर कारण जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के प्रक्रिया में देरी होती है।

मण्डलायुक्त ने सम्बन्धित को निर्देशित करते हुए कहा कि परिषदीय विद्यालयों के बच्चों का आधार कार्ड काफी संख्या में अभी तक नहीं बन पाया है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाया, आधार कार्ड बनाने में जन्म प्रमाण-पत्र की आ रही समस्या के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभाग से समन्वय स्थापित करते हुए जन्म प्रमाण-पत्र को जारी किया जाये, जिससे बच्चों का आधार बन सके और उन्हें आधार कार्ड के माध्यम से मिलने वाले सरकारी लाभों से जोड़ा जा सके।

इसी प्रकार से मण्डलायुक्त ने जनपद के उप जिलाधिकारी न्यायालय में लंबित मुकदमों के पत्रावालियों सम्बन्ध में समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान उन्होंने उप जिलाधिकारी व तहसीलदार को निर्देशित करते हुए कहा की ज्यादा से ज्यादा मुकदमों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाये। 3 महीने से ऊपर के पत्रावालियों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार किया जाये, जिससे मुकदमों से सम्बन्धित मामलों में कमी आ सके।

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