नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

सरकार की प्रत्येक रजिस्टर्ड संस्था, विभाग, इकाई को अपने अधिकार क्षेत्र में CSR फंड खर्च करने का हक होता है। जलगांव जिले के सबसे विकसित ब्लॉक के सपने से नवाजे जाने वाले जामनेर MIDC में कारखाने नहीं आने, चालू कारखाने बंद और बंद पड़े कारखाने शुरू नहीं होने का प्रमुख कारण CSR में की जाने वाली आर्थिक धांधली तथा हफ्ताखोरी है। सिंचाई विभाग के एक मसले को लेकर जिला सत्र न्यायालय ने पुलिस को जांच के आदेश दिए हैं। तापी सिंचाई विकास प्राधिकरण की ओर से कुल 450 करोड़ के फंड से जामनेर तहसील क्षेत्र में विकास कार्य करने हेतु 50 करोड़ रुपयों के टेंडर पास करवाने की प्रक्रिया में विकासक की ठगी करी गई है।
पीड़ित अजय बढ़े को पूर्व सिंचाई अधिकारी वसंत दत्तात्रय पाटील की ओर से उक्त रूप से काम का ऑफर मिला। बढ़े पाटील से मिले और गोल्ड रिवर कंपनी को बैंकिंग प्रक्रिया तहत 20 लाख रुपए RTGS किए। पाटील के पंटर पंकज नेमाड़े को काम की लाइन लगाने के लिए 5 लाख रुपए कैश दिए। समय बिता CSR से संबंधित कोई टेंडर नहीं निकला। जिला पुलिस अधीक्षक समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई गई जिसके बाद पुलिस ने मामला आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दिया। लेनदेन के प्रकरण में दोषियों पर फौजदारी मामला दर्ज करने में पुलिस ने लापरवाही बरती। निश्चित रूप से किसी न किसी सफेदपोश काले चोर का पुलिस के ऊपर दबाव रहा होगा।
पीड़ित ने कोर्ट में अपील दायर की जिसकी सुनवाई करते हुए जिला सत्र न्यायाधीश जान्हवी केलकर ने पुलिस को आदेश दिए हैं कि इस मामले में फौजदारी शिकायत दर्ज करे। ठगी के इस मामले में तापी सिंचाई विभाग के वर्तमान प्रमुख गोकुल महाजन, वी डी पाटील, सुहास भट्, पवन कोलते, वी के जैन, ललित चौधरी, पंकज नेमाड़े, सूर्या चौहान इन आठ को आरोपी बनाया गया है। ज्ञात हो कि शिकायत के बाद यह मामला खुलकर सामने आया लेकिन तापी तथा वाघूर सिंचाई विभाग के बने बांधों में भ्रष्टाचार के हजारों ऐसे मामले हैं जो जलसमाधि ले चुके है।

