शासकीय मापदण्ड को ताक पर रखकर हो रहा है नाली निर्माण कार्य,  अधिकारीयों पर घटिया निर्माण कार्य को संरक्षण देने का आरोप | New India Times

पीयूष मिश्रा, सिवनी ( मप्र ), NIT; ​शासकीय मापदण्ड को ताक पर रखकर हो रहा है नाली निर्माण कार्य,  अधिकारीयों पर घटिया निर्माण कार्य को संरक्षण देने का आरोप | New India Timesसिवनी जिले के छपारा शासन की ग्राम विकास योजनाओं में उच्च अधिकारीयो के संरक्षण से पलीता लगाने का काम कई वर्षो से बेरोक टोक जारी है। ग्राम पंचायतों में होने वाले विभिन्न योजनाओं से बनने वाली कांक्रीट रोड, नाली, पुलिया, भवन शासकीय स्टीमेट को ताक पर रखकर मनमाने निर्माण कार्य अत्याधिक धन कमाने की लालच में कराये जा रहे हैं। इन गुणवत्ताविहीन कार्यो की उच्चस्तरीय शिकायत की जाती है तो अधिकारी द्वारा निष्पक्ष कार्यवाही करने के बजाए उलटा शिकायत कर्ता पर राजी नामा करने का दबाब डाला जाता है, जबकि अधिकारीयों को निर्माण स्थल पर हो रहे गुणवत्ताविहीन कार्यो को बन्द करवाकर शासकीय स्टीमेट से उक्त निर्माण कार्यो को करवाना चाहिये जिससे शासन की ग्राम विकास की निर्माण कार्य योजना सही मायने में क्रियान्वयन हो सके।​शासकीय मापदण्ड को ताक पर रखकर हो रहा है नाली निर्माण कार्य,  अधिकारीयों पर घटिया निर्माण कार्य को संरक्षण देने का आरोप | New India Timesइसी तरह का एक मामला ग्राम पंचायत छपारा के कुम्हारी वार्ड में निर्माणाधीन नाली में देखने को मिला है। बताया जाता है कि पंचपरमेश्वर की राशी से व्यायामशाला से कुम्हारी वार्ड तक नाली  बनायी जा रही है, जिसमें मनमाने तरीके से घटिया किस्म का निर्माण कार्य किया जा रहा है। छपारा के उक्त वार्ड के एक नागरिक ने गुणवत्ता विहीन नाली की शिकायत जन समस्या निवारण विभाग (१८१) एवं जिला पंचायत मुख्यकार्यपालन अधिकारी व छपारा जनपद के मुख्यकार्यपालन अधिकारी के व्हाटसप नम्बर पर नाली  सम्बन्धी निर्माण कार्य की फोटो सहित पोस्ट किया था,  बाबजूद इसके उक्त गुणवत्ताविहीन नाली का निर्माण धडल्ले से जारी है। उक्त नाली में लोहे की छड का उपयोग नहीं किया जा रहा है जबकि शासकीय स्टीमेट में गहरी नाली निर्माण में लोहे का इस्तेमाल करना बताया गया है। इस सम्बन्ध मे तकनीकीय विभाग के एक अधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने भी बताया कि लोहे की छड इस्तेमाल गहरी नाली निर्माण के स्टीमेट में होता है, परन्तु उक्त नाली निर्माण में एक टुक्डा लोहा का उपयोग नहीं किया गया है। गुणत्ताविहीन नाली  ऐसी स्थिति में कुछ ही माह की महमान है। चिन्ता का विषय यह है कि उक्त विषय की जानकारी स्थानीय मुख्यकार्यपालन अधिकारी छपारा को है परन्तु अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी है जो कई तरह के संदेह को जन्म देता है।

ऐसे में यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीँ होगा कि इन  गुणवत्ताविहीन कार्यो में अधिकारीयों का संरक्षण है। क्या शासन की योजना का क्रियान्वयन निर्माण एेजेंसी के मनमाने स्टीमेट पर होगा या शासन के निर्धारित स्टीमेट पर होगा? जागरूक नागरिकों का आरोप है कि इन घटिया निर्माण कार्य में ठेकेदार के साथ अधिकारीयों की मिलीभगत है और इस कार्य से अधिकारियों को अवैध रूप से कमीशन मिल रहा है।

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