मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT
:जहाँ एक ओर केंद्र और राज्य सरकार पर्यावरण को बचाने के लिए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे वृहद वृक्षारोपण अभियान चला रही है, वहीं जुन्नारदेव क्षेत्र से इसके ठीक उलट तस्वीरें सामने आ रही हैं। प्रशासन द्वारा जगह-जगह पौधे रोपे जा रहे हैं, लेकिन क्षेत्र के कुछ हिस्सों में अवैध रूप से पेड़ों की कटाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
जामई और दमुआ में अवैध कटाई का तांडव
ताजा जानकारी के अनुसार, जामई और दमुआ क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में बड़े स्तर पर वृक्षों की कटाई की जा रही है। स्थानीय लोगों और आम नागरिकों द्वारा की जा रही इस कटाई से न केवल हरियाली कम हो रही है, बल्कि भविष्य में इसके गंभीर पर्यावरणीय दुष्परिणाम होने की आशंका है।
विभागीय तालमेल की कमी का फायदा उठा रहे माफिया?
क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि प्रशासन समय रहते नहीं चेता, तो आने वाली पीढ़ियों को भीषण गर्मी और जल संकट का सामना करना पड़ेगा। इस अवैध कटाई को रोकने के लिए तीन प्रमुख विभागों का साथ आना अनिवार्य है:
WCL (वेकोली): कोल माइनिंग क्षेत्रों के आसपास की भूमि की सुरक्षा।
राजस्व विभाग: सरकारी जमीनों पर हो रहे अतिक्रमण और कटाई पर लगाम।
वन विभाग: वन संपदा की रक्षा और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई।
अधिकारियों को ध्यान देने की आवश्यकता
क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने मांग की है कि संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले को संज्ञान में लें। WCL, राजस्व और वन विभाग को संयुक्त टीम बनाकर इन क्षेत्रों का दौरा करना चाहिए और अवैध कटाई में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
“एक तरफ हम पौधा लगाकर उसे पालने की शपथ ले रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ फलते-फूलते पेड़ों की बलि दी जा रही है। यह विडंबना प्रशासन की सतर्कता पर सवाल खड़े करती है।”
