संदीप तिवारी, ब्यूरो चीफ, पन्ना (मप्र), NIT:

नगर अमानगंज में ट्रैफिक की समस्या दिन-प्रतिदिन बडी चुनौती बनती जा रही है। यातायात व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए प्रशासनिक समितियों का निर्णय कागजों तक ही सीमित है। पुराने बस स्टैंड के नाम से लोग जिस जगह को जानते हैं उसमें गांधी चौराहे की हालत बड़ी ही नाजुक है यहां से गुजरते JK सीमेंट के बड़े ट्रकों की लगातार धमाचौकड़ी हो या अन्य और भी बड़े ओवर लोड वाहनों की आवाजाही से जाम की यह स्थिति हो जाती है कि दो पहिया वाहनों का भी निकलना मुश्किल हो जाता है। बड़े वाहनों को कब इंट्री हो कितने बजे से हो हर जगह प्रावधान है पर यहां नहीं, शायद आपको याद हो कि कुछ समय पहले एक युवक की दर्दनाक मौत ट्रक के नीचे आने से हो गई थी लेकिन फिर भी पुरानी स्थिति लंबे समय से बनी हुई है। नगर के मुख्य मार्ग की चौड़ाई बढ़ाने के लिए नगर परिषद स्थानीय प्रशासन के पास कोई योजना नहीं है बल्कि मार्ग स्थित जो फुटपाथ पूर्व के बने हुए हैं उनका अस्तित्व भी लगभग समाप्त हो गया है। फुटपाथ को सुरक्षित नहीं किये जाने की वजह से अतिक्रमाणकारियों का अवैध कब्जा लगातार बढ़ता जा रहा है। दुकानदारों द्वारा वह दुकान खोलने के साथ फुटपाथ पर अपना सामान रख दिया जाता है जो कि दिनभर रखा रहता है। इसके चलते जहां पैदल एवं साइकिल से चलने वाले लोगों के लिए जगह नहीं बचती वहीं बड़े वाहनों को जगह देने के लिए दो पहिया वाहन चालकों के पास भी फुटपाथ नहीं होने की वजह से जगह नहीं रह जाती ऐसी स्थिति में बडे वाहनों से दो पहिया वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा हमेशा बना रहता हेै।
लंबे समय से अतिक्रमण को हटाने को लेकर स्थानीय प्रशासन पुलिस द्वारा कार्यवाही नहीं की गई है। अभियान लंबे समय से बंद होने की वजह से हाथ ठेला, गुमटियों तथा अन्य रूप में अस्थाई अतिक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है जो कि ट्रैफिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी परेशानी बना हुआ है। जबकि कुछ मार्गों पर बड़े वाहनों को गुजरने के लिए बायपास भी बना हुआ है।
आखिर अमानगंज में कब होगी वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था
समय के साथ दो पहिया और चार पहिया वाहन लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में वाहनों के लिए पार्किंग स्थल बनाया जाना बेहद ही जरूरी है जिससे ट्रैफिक व्यवस्था को कन्ट्रोल किया जा सकता है और अब jk कम्पनी के ट्रकों द्वार गायों की दुर्घटना में अकाल मौत की घटना सामने आ गई, देखना होगा कि नगर परिषद इस जाम की चुनौती या यूं कहें इन आकस्मिक मौत जेसी घटनाओं पर रोक के लिए क्या एक्शन लेती है?
