नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

ब्रिटेन को पछाड़कर दुनिया की सबसे बड़ी पांचवी अर्थव्यवस्था बने विश्वगुरु भारत में कोरोना काल से लेकर अब तक 80 करोड़ लोग फ्री के राशन पर निर्भर हैं बावजूद इसके समूचे विश्व में भारत की आन बान शान प्रतिष्ठा में अभूतपूर्व इजाफा हुआ है। मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना को 2023 के अंत तक चलाने की घोषणा की है। बीते साल गेंहू की कम पैदावार के चलते सरकार की गलत निति के कारण स्टॉक में चावल पर्याप्त था और गेंहू कम! PMGKY के ऑनलाइन वितरण में दुकानदारों की संघटित मनमानी और चालबाजी देखने को मिल रही है। जलगांव जिले के सभी तहसीलों में राशन वितरक बायोमेट्रिक मशीन में कार्ड धारकों के अग्रिम अंगूठे लेकर उनको आधा ही माल दे रहे हैं। अग्रिम अंगूठा लेने का बड़ा मजेदार कारण दुकानदार बताते हैं वह यह कि option laps (विकल्प अवरुद्घ) हो जाता है। नवंबर, दिसंबर 2022 का फ्री दिसंबर 2022 का रेगुलर, जनवरी 2023 के फ्री राशन में यह घपला बड़े पैमाने पर किया गया है। RC details में बिना राशन कार्ड दर्ज किए किसी एक दुकानदार ने 155 kg माल उठाया उसमें से 95 kg बांटा और 60 kg गायब कर दिया। जब लाभधारक गूगल पर GPPDS में सर्च कर अपने राशन कार्ड नंबर को एंटर करेगा और वितरण का स्टेटस देखेगा तो फैमिली यूनिट के हिसाब से सब कुछ ओके दिखेगा लेकिन असल में लाभधरक को आधा ही राशन दिया गया है। कोई लाभधरक मामले को लेकर दुकानदार से शिकायत करेगा तो उसको दुकानदार सीधे धमकी देता है कि उस लाभार्थी का नाम PMGKY से डिलीट कर देंगे, जिसके चलते कोई गरीब शोषित शिकायत करने आगे नहीं आता। पंचायत राज मंत्री गिरीश महाजन के गृह निर्वाचन जामनेर में तो ऐसे मामले भरे पड़े हैं। वितरण अधिकारी और सारा का सारा सिस्टम अनाज की इस चोरी में मिला हुआ है। जलगांव जिले में कुल 15 तहसील हैं सभी में उक्त प्रकार से गरीबों का राशन लूटकर कालाबाजारी की जा रही है। गरीबों की जिंदगी से जुड़े इस मामले को लेकर विपक्ष गहरी नींद सो रहा है, वह तब ही जागता है जब सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान सरकार की संवैधानिक वैधता पर होने वाली सुनवाई हो रही होती है। राशन वितरण में दुकानदारों की ओर से किए जा रहे भ्रष्टाचार की व्यापकता बहुत बड़ी है जिसे सरकार में बैठे नेताओं का संरक्षण प्राप्त है। नए नए पधारे जिला कलेक्टर अमन मित्तल के तेवर काफी सख्त थे जो बाद में मुलायम पड़ गए हैं! राशन वितरण में सैकड़ों टन माल गायब कर दिया जा चुका है।
