माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा तीर्थ; शिव महापुराण कथा का हुआ भव्य समापन | New India Times

रहीम शेरानी हिंदुस्तानी/पंकज बड़ोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा तीर्थ; शिव महापुराण कथा का हुआ भव्य समापन | New India Times

श्री विमलेश्वर महादेव रेवा धाम आश्रम, बेलसर (बड़वाह) में आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण में भव्य समापन हुआ। समापन अवसर पर पूरा धाम “हर-हर महादेव” और “जय श्री गणेश” के जयघोष से गुंजायमान रहा।
वैदिक मंत्रोच्चार, हवन-पूजन और महाआरती के साथ कथा का विधिवत समापन किया गया। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्म लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाई और महाप्रसाद ग्रहण किया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का आश्रम पहुंचना शुरू हो गया था।
कथा व्यासपीठ से पंडित राजेश शर्मा ने भगवान गणेश के विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि गणेश जी का विवाह ऋद्धि और सिद्धि से हुआ, जो बुद्धि और सफलता की प्रतीक हैं। उन्होंने गणेश और कार्तिकेय के बीच हुई परिक्रमा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि गणेश जी ने माता पार्वती और भगवान शिव की परिक्रमा कर उन्हें ही संपूर्ण संसार माना।
उन्होंने कहा कि माता-पिता की सेवा और सम्मान ही समस्त तीर्थों के समान है।
कथावाचक ने इसे जीवन में संस्कार, बुद्धिमत्ता और पारिवारिक मूल्यों का महत्वपूर्ण संदेश बताया। कार्यक्रम में संत भोला दास महाराज सहित कई संतजन उपस्थित रहे। आयोजन में आश्रम समिति अध्यक्ष अनूप सिंह पटेल, दीपक सोनी एवं संत बलिराम महाराज का विशेष सहयोग रहा। जानकारी पंडित भास्कर शर्मा ने दी।

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