बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये राज्यों को कार्रवाई करनी चाहिये, जिसके लिये रेल-सह-सड़क मार्ग (आरसीआर) प्रणाली का उपयोग किया जायेः विद्युत मंत्री आर.के. सिंह | New India Times

अतीश दीपंकर, नई दिल्ली, NIT:

बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये राज्यों को कार्रवाई करनी चाहिये, जिसके लिये रेल-सह-सड़क मार्ग (आरसीआर) प्रणाली का उपयोग किया जायेः विद्युत मंत्री आर.के. सिंह | New India Times

केंद्रीय विद्युत एवं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने ताप बिजली घरों के लिये कोयले के आयात की स्थिति पर राज्यों के साथ समीक्षा की। बिजली सचिव आलोक कुमार, राज्य सरकारों और बिजली कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

यह बैठक कल वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई थी। श्री सिंह ने बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिये घरेलू कोयला आपूर्ति की अड़चनों को ध्यान में रखते हुये ताप बिजली संयंत्रों के लिये कोयले के आयात के महत्त्व को रेखांकित किया, ताकि आयातित कोयले को घरेलू कोयले के साथ उपयोग किया जा सके। ऐसा करने से मई 2022 में ही बिजली संयंत्रों को अतिरिक्त कोयला मिल जायेगा। उन्होंने कहा कि कोयला कंपनियों द्वारा प्राप्त कोयले के अनुपातानुसार सभी बिजली कंपनियों को घरेलू कोयले की आपूर्ति की जायेगी। श्री सिंह ने राज्यों को सलाह दी कि वे कोयले की अपनी आवश्यकता पूरी करने के लिये कंपनियों के स्वामित्व वाली खानों से कोयले की आपूर्ति बढ़ायें। इससे कोयले की आवश्यकता पर पड़ने वाला बोझ कम होगा। उन्होंने जोर दिया कि राज्यों को बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये कार्रवाई करनी चाहिये, जिसके लिये आरसीआर का उपयोग किया जाये, ताकि उनके यहां बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी को पूरा किया जा सके। इस स्थिति में अगर राज्य आरसीआर कोयला नहीं उठायेंगे, तो उसे अन्य राज्यों को आबंटित कर दिया जायेगा। तब सम्बंधित राज्य कमी के लिये खुद जिम्मेदार होगा, जिसके कारण उक्त राज्य में बिजली की कटौती होने लगेगी।

बैठक में सीईए द्वारा पेश किये गये आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि तमिलनाडु और महाराष्ट्र ने कोयले के आयात के लिये आर्डर दे दिया है, जबकि पंजाब और गुजरात अपनी संविदाओं को अंतिम रूप देने के चरण में हैं। इनके अलावा अन्य राज्यों को कोयले के आयात के लिये अतिरिक्त प्रयास करने की जरूरत है, ताकि उस कोयले को घरेलू कोयले के साथ मिलाकर बिजली संयंत्रों में इस्तेमाल किया जा सके।

राजस्थान और मध्यप्रदेश संविदायें जारी करने की प्रक्रिया में हैं, वहीं हरियाणा, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड ने न तो कोई संविदा जारी की है और न कोयले के आयात के लिये कोई अहम पहल की है। इन राज्यों को सलाह दी गई कि वे अपने बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये आवश्यक कार्रवाई करें।

आरसीआर की स्थिति पर भी चर्चा की गई। इस दौरान देखा गया कि आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और उत्तरप्रदेश द्वारा आबंटित कोयले का उठान संतोषजनक नहीं है। इन राज्यों को सलाह दी गई वे फौरन कोयला उठा लें, वरना आरसीआर कोयला किसी अन्य बिजली कंपनी को आंबटित कर दिया जायेगा, जिन्हें उस कोयले की जरूरत होगी।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.