सत्ता संघर्ष में उलझा आंदोलन, नेताओं की अनुकंपा झूठी: प्रफुल्ल लोढ़ा | New India Times

नरेन्द्र इंगले, जामनेर/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

सत्ता संघर्ष में उलझा आंदोलन, नेताओं की अनुकंपा झूठी: प्रफुल्ल लोढ़ा | New India Times

बीते 15 दिनों से चल रही परिवहन निगम की हड़ताल लगातार जारी है. मामला हाई कोर्ट में है बावजूद इसके कर्मचारी निगम को सरकार में विलीन करने की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं. हजारों कर्मचारी मुंबई के आजाद मैदान में प्रतिनिधिक रूप से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. अगले महीने राज्य विधानसभा का शीतसत्र होने जा रहा है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा द्वारा ठाकरे सरकार को उखाड़ फैंकने के दंभ के बाद इस मैदान में भाजपा के आंदोलनजीवी नेताओं ने ठाकरे सरकार के खिलाफ डेरा जमा लिया है, आशा है कि विपक्ष के यह नेता हृदय से हड़ताली कर्मियों के पक्ष में होंगे और हड़ताल समाप्त करने के लिए मोदी सरकार से हरसंभव सहायता पाने के प्रयास करेंगे.

सत्ता संघर्ष में उलझा आंदोलन, नेताओं की अनुकंपा झूठी: प्रफुल्ल लोढ़ा | New India Times

तहसील स्तर पर विपक्ष के स्थानीय नेता संगठन हड़ताली पंडालों में जाकर बस कर्मियों का हौसला बढ़ा रहे हैं. जामनेर में समाजसेवी प्रफुल्ल लोढ़ा ने कर्मियों से मिलकर उनकी मांग को उपमुख्यमंत्री तक पहुंचाने की बात कही, लोढ़ा ने कहा कि कई नेता आएंगे जाएंगे आपके प्रति अनुकंपा व्यक्त करेंगे, जब सूबे में देवेंद्र फडणवीस की सरकार थी तब कर्मियों की विलीनीकरण की मांग क्यों मानी नहीं गई? आंदोलन को गलत दिशा देकर हड़ताली कर्मियों को भड़काने का काम विपक्ष कर रहा है. केंद्र में मोदी सरकार चाहे तो वह राज्य सरकार के समन्वय से इस मांग को मंजूर कर सकती है. प्रफुल्ल लोढ़ा ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार से मुलाकात कर इस मामले पर शाश्वत समाधान निकलने की मांग की है. विदित हो कि परिवहन निगम 12 हजार करोड़ के वित्तीय घाटे में है बावजूद इसके सरकार ने कर्मियों की अधिकांश मांगें मान ली हैं लेकिन 1 लाख से अधिक बस कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें सरकारी कर्मी बनाया जाए. सोशल मीडिया पर बस हड़ताल इस बहस के साथ ट्रोल होते पायी जा रही है की जब मोदी सरकार का झुकाव निजीकरण की ओर है तो राज्य सरकार परिवहन निगम को पूर्ण सरकारी अंग कैसे बनाए. बस के चक्के रुकने से ग्रामीण क्षेत्रों में यात्री यातायात की गति धीमी हुई है पर बंद नहीं.

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