मिसाल सुनी बुजुर्गों से सूरज के डूबने पर लाली बताती है फिर उदगम कल सुबह होगी इंसानियत-उम्मीद के साथ : मो. तारिक   | New India Times

मोहम्मद तारिक, भोपाल, NIT; मिसाल सुनी बुजुर्गों से सूरज के डूबने पर लाली बताती है फिर उदगम कल सुबह होगी इंसानियत-उम्मीद के साथ : मो. तारिक   | New India Times​”गुजिश्ता 1-2 सालों पहले तक हमारे देश में शौचालय नहीं थे !” और वह बात करते हैं एफएसएसएआई के तहत 8 राज्यों में से एक भी बूचड़खाना पंजीकृत नहीं ! जो सम्मानीय विद्वान संवाददाता पत्रकार कभी भोपाल के सलाटर हाउस और उसके पास से निकले नाला जहां-जहां गया वहां गए नहीं ! नाला पक्का बना या वर्तमान में नाला है कि नहीं ! नियमानुसार पशु वध से पहले स्वास्थ्य परीक्षण होता है कि नहीं और प्रमाण पत्र जारी होता है तो वह डॉक्टर जांच के समय उपस्थित है कि नहीं !
सात दशक से भारतीय गंगा जमुनी संस्कृति-सभ्यता के लिए खतरा बनें देश के 25% शिक्षित और संपन्न परिवार ही देश में जहर-नफरत संप्रदायिकता फैलाते हैं!

 देश के विद्वान, लेखक, संवाददाता और पत्रकार नहीं चाहते देश के हालात सुधरे। सीमा पर सेना और देश की आंतरिक सुरक्षा, शांति और व्यवस्था में लगी पुलिस सहित 75% देश के आम नागरिक हैं परेशान अर्थात वह आम नागरिक जो प्रतिदिन कमाते तो खाते हैंI  गुजिश्ता 1-2 सालों तक हमारे देश में शौचालय नहीं थे और प्रतिदिन पढ़ते रहिए हमारे देश के मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का सबसे बड़ा हिंदी भाषा का सबसे बड़ा हिंदी समाचार पत्र दैनिक जागरण भोपाल में हमारे देश के हिंदी भाषा में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बड़े-बड़े विद्वान, राष्ट्रीय स्तर के संवाददाता और खोजी पत्रकारों के बड़े-बड़े लेख … 

  • “गुजिश्ता 1-2 सालों तक हमारे देश में शौचालय नहीं थे !”

 अपने मुंह से मियां-मिट्ठू बने कहते राष्ट्रवादी जो धर्मनिरपेक्ष असहिष्णु बने हुए ! तुमने अपने स्वार्थों के खातिर देश का धार्मिक बंटवारा कैसे स्वीकार किया और अब वह क्यों अपनी योग्यता से इंसानियत को बांट हो रहे यार ..

ऐसा कहते हैं एक मिसाल सुनी है बुजुर्गों से कि सूरज के डूबने पर उसकी लाली बताती है कि फिर होगा उसका उदगम कल फिर सुबह होगी और वह सुबह उसके उपरांत इंसानियत का बोलबाला, इसी उम्मीद के साथ !!!
                    “अब तो वैचारिक द्वंद है” !

                   मो. तारिक (स्वतंत्र लेखक)

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