डीयू में सतपाल तंवर की सक्रियता से बढ़ी हलचल, BNVP छात्र संगठन के गठन की तैयारी; पुलिस सतर्क | New India Times

फैज़ान खान, गुरुग्राम/नई दिल्ली, NIT:

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में भीमसेना प्रमुख नवाब सतपाल तंवर की सक्रियता से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। तंवर, जो संविधान सुरक्षा पार्टी (SSP) के सुप्रीमो भी हैं, डीयू कैंपस में BNVP (बीएनवीपी) नामक छात्र संगठन की नींव रखने के लिए सक्रिय रूप से डेरा डाले हुए हैं।

यह छात्र संगठन संविधान सुरक्षा पार्टी और भीमसेना के संयुक्त प्रयास से दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक और सामान्य वर्ग के जरूरतमंद छात्रों के हितों की रक्षा करने का दावा कर रहा है।

छात्रों से व्यक्तिगत मुलाकातें और बैठकों का दौर

सूत्रों के अनुसार, सतपाल तंवर पिछले कुछ दिनों से डीयू के नॉर्थ कैंपस में आर्ट्स फैकल्टी और लॉ फैकल्टी में छात्र-छात्राओं से व्यक्तिगत मुलाकातें कर रहे हैं। विभिन्न बैठकों के जरिए बीएनवीपी की रूपरेखा तैयार की जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि फरवरी 2026 के अंत तक इस छात्र परिषद की औपचारिक घोषणा की जा सकती है।

तंवर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि “संविधान सुरक्षा पार्टी एक आंदोलन है” और जल्द ही डीयू तथा जेएनयू में छात्र संगठन की शुरुआत होगी। उन्होंने यूजीसी के नए नियमों का समर्थन करते हुए शिक्षण संस्थानों से मनुवाद खत्म करने का दावा किया है।

कैंपस राजनीति में नई चुनौती

उनकी गतिविधियों से डीयू कैंपस में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। पहले से मौजूद छात्र संगठनों ABVP, NSUI, AISA आदि के बीच BNVP एक नई चुनौती के रूप में उभर सकता है। पिछले कुछ वर्षों से एबीवीपी और एनएसयूआई का दबदबा रहा है, लेकिन अब दलित, ओबीसी, आदिवासी, अल्पसंख्यक और सामान्य वर्ग के जरूरतमंद छात्रों के लिए एक नया विकल्प सामने आ सकता है।

पुलिस की नजर, आधिकारिक बयान नहीं

भीमसेना प्रमुख सतपाल तंवर पहले भी कई विवादों में रहे हैं। वे 2010 में भीमसेना के संस्थापक हैं और दलित मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। उनकी हालिया गतिविधियों पर दिल्ली पुलिस नजर बनाए हुए है, खासकर कैंपस में संगठन विस्तार के मद्देनजर। पुलिस सूत्रों के अनुसार स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अंबेडकर प्रतिमा का मुद्दा भी उठाया

तंवर ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा न होने पर नाराजगी जताई है और इसे प्रमुख मुद्दा बनाने की दिशा में काम करने की बात कही है।

यह घटनाक्रम डीयू जैसे प्रमुख विश्वविद्यालय में नई राजनीतिक ताकत के उदय का संकेत दे रहा है, जहां छात्र हितों और संवैधानिक मूल्यों को लेकर नया संगठन मैदान में उतरने की तैयारी में है।

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