जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के नाम पर की जा रही अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को लेकर एक बार फिर भोपाल नगर निगम सवालों के घेरे में आ गया है। दिनांक 09 फरवरी 2026 को ताज होटल, भदभदा के पास नगर निगम के अतिक्रमण दस्ते द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। मौके पर मौजूद दो बुजुर्ग, जिनका कोई सहारा नहीं है और जिनका पालन-पोषण मोहल्लेवासी भोजन व जरूरतों के माध्यम से करते हैं, उनकी स्थिति पर भी निगम अमले ने कोई ध्यान नहीं दिया। आरोप है कि बुजुर्गों के घर के आसपास मौजूद सामान और ढांचे को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के तोड़ दिया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, निगम अधिकारियों ने न तो बुजुर्गों की उम्र और असहाय स्थिति को देखा और न ही यह समझने की कोशिश की कि वे कहां जाएंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि NGT का हवाला देकर मनमानी कार्रवाई की गई और पीड़ितों की एक भी बात नहीं सुनी गई।
मोहल्ले के लोगों ने आरोप लगाया कि नगर निगम का अमला केवल सुर्खियों में बने रहने और अधिकारों का रौब दिखाने के लिए इस तरह की कठोर कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी विकलांगों, विधवाओं और अनाथों के मामलों में संवेदनहीनता देखने को मिली है।

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बुजुर्गों की बेबसी साफ दिखाई देती है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने नगर निगम से मांग की है कि NGT के नियमों के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए और पीड़ित बुजुर्गों के लिए तत्काल पुनर्वास व सहायता की व्यवस्था की जाए।
फिलहाल नगर निगम की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन घटना ने अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

