वी.के.त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी की पलिया कलां तहसील के सरकारी स्कूलों का जायजा लेने के लिए पत्रकारों की टीम आज सुबह तहसील पलिया क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों का रियलिटी चेक करने पहुंची तो उम्मीदों से भी परे इन सरकारी स्कूलों में वह तस्वीर देखने को मिली जो उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों को लेकर किए जाने वाले तमाम बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती है।
पहला स्कूल

प्राथमिक विद्यालय नवरंगपुर विकासखंड पलिया कला में जब हमारी टीम 9:00 बजे विद्यालय पहुंची तो वहां पर अध्यापिका सना वारिस मिली वहीं इंचार्ज व प्रधानाध्यापिका कनक प्रभा 2 दिन के अवकाश पर थी वहीं स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण थोड़ा सा लेट पहुंची। परंतु विद्यालय की व्यवस्था कुछ हद तक ठीक पाई गई। कुल 60 बच्चों में 38 बच्चे उपस्थित पाए गए। आपको बता दें आज प्राथमिक विद्यालय के छात्रों की अंग्रेजी व कला की परीक्षा थी वहीं उसी प्रांगण में स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय जिसमें कुल 52 में 45 बच्चे उपस्थित मिले वहीं बच्चों से बात करने पर शौचालय वह एमडीएम तथा पढ़ाई को लेकर संतोषजनक उत्तर मिला।
दूसरा विद्यालय

इसी क्रम में हमारी टीम दूसरे विद्यालय पटीहन विकासखंड पलिया में पहुंची जहां पर कुल 7 अध्यापकों में 6 उपस्थित मिले व एक अवकाश पर मिले, वहीं बच्चों से बात करने पर बच्चों ने पिछले 6 महीने से स्कूल प्रांगण में शौचालय न होना बताया जिसकी वजह से कक्षा 6 से 8 तक की बड़े-बड़े छात्र-छात्राओं से लेकर कक्षा एक से पांच तक के छोटे-छोटे बच्चों को व स्कूल के अध्यापकों व अध्यापिकाओं को भी मजबूरन खुले में शौच के लिए जाने को मजबूर होना पड़ता है।
इस संबंध में जब हमारे संवाददाता ने ग्राम प्रधान पटीहन से बात की तो उनका कहना था कि स्कूल का काम चल रहा है जबकि बच्चों ने आरोप लगाया है कि पिछले 6 माह से यह शौचालय बंद पड़ा है जबकि कुल 338 विद्यार्थी पंजीकृत हैं इस स्कूल में और शौचालय न होने से विकट समस्या उत्पन्न है। आपको बता दें यह शौचालय मॉडल शौचालय के रूप में बना था परंतु दुर्दशा देखकर लगता है कि योगी शासन के आदेश की अवहेलना का ठेका इन्हीं अधिकारियों व प्रधानों ने ले रखा है।
तीसरा विद्यालय
इसके बाद हमारी टीम ने प्राथमिक विद्यालय व उच्च माध्यमिक विद्यालय अंबेडकर नगर पहुंची जहां पर स्थिति और भी दयनीय थी, छोटे-छोटे मासूम बच्चे बालू मिट्टी के ढेर पर बैठ कर खाना खाने को मजबूर थे।
जब हमारी टीम ने उच्च प्राथमिक विद्यालय एकल अध्यापक करन से सोमवार को मध्याह्न भोजन में बने मेनू की जानकारी चाहिए तब उन्होंने बताया कि मीनू में सब्जी व रोटी के साथ एक मौसमी फल भी दिया जाता है जबकि बच्चों से बात की तब उनका कहना था काफी दिनों से कोई फल नहीं दिया जाता है वहीं बच्चों ने आरोप लगाया कि सर जी हम से ही शौचालय में पानी डलवा कर सफाई करवाते हैं।
जब हमने अध्यापक से एमडीएम रजिस्टर की मांग की तो पाया कि सोमवार को एमडीएम में दाल रोटी के साथ फल भी दिया होना अंकित किया गया था परंतु हकीकत में ऐसा नहीं था जिसकी जानकारी हमें बच्चों ने दी। वहीं बच्चों ने बताया कि सर हफ्ते में चार दिन लगभग 10:00 बजे आते हैं वही 2 दिन 9:00 से 9:30 बजे तक साथ ही जब हमारी टीम ने उसी प्रांगण में स्थित प्राथमिक विद्यालय अंबेडकरनगर विकासखंड पलिया में जाकर वहां की स्थिति जानने की कोशिश की तब पता चला कि पिछले 6 माह से इंडिया मार्का हैंडपंप खराब होने से छोटे-छोटे मासूम बच्चों को पास के उच्च माध्यमिक विद्यालय व स्कूल प्रांगण से बाहर जाकर पानी पीना पड़ रहा है। वहीं बच्चों ने बताया कि उन्हें भी कोई भी मौसमी फल सोमवार को नहीं मिला जबकि प्रभारी इंचार्ज दुर्गेश चंद्र ने हमें बताया कि बच्चों को सोमवार को रोटी सब्जी के साथ एक मौसमी फल दिया गया था परंतु बच्चों ने हाथ खड़ा कर अध्यापक के झूठ की पोल खोल दी।
आपको बता दें कि उच्च माध्यमिक विद्यालय जिसमें कुल बच्चे 76 तथा उपस्थित 66 वहीं प्राथमिक विद्यालय अंबेडकरनगर में कुल 163 में 149 छात्र-छात्राएं उपस्थित मिले। वहीं जब इस संबंध में हमने अवकाश पर गए इंचार्ज व प्रधानाध्यापक राजेश कुमार से फोन पर बात कर एमडीएम रजिस्टर की मांग की तो उन्होंने अध्यापक दुर्गेश चंद्र को रजिस्टर दिखाने को कहा परंतु दुर्गेश चंद्र को एमडीएम रजिस्टर कार्यालय में नहीं मिला।
आपको बता दें कि बच्चों ने यह भी बताया है कि प्राथमिक विद्यालय की कुल 4 शिक्षक भी समय से स्कूल नहीं पहुंचते हैं, कुछ 9:30 तो कुछ 10:00 बजे तक पहुंचते हैं।
चौथा विद्यालय
इसी क्रम में जब हमारी टीम प्राथमिक विद्यालय गजरौला विकासखंड पलिया पहुंची तो वहां पर सारे विद्यालयों से इस विद्यालय की स्थिति बहुत ही उम्दा पाई गई, जिसमें बच्चों की उपस्थिति प्रतिशत एमडीएम में मीनू के हिसाब से खाना मिलना, अध्यापकों का समय पर स्कूल पहुंचना, व शौचालयों का दुरुस्त और अच्छा होना पाया गया, वहीं छोटे-छोटे बच्चों ने भी यही सब बताया।
पांचवा विद्यालय
इसी क्रम मे हमारी टीम पहुंची आखरी विद्यालय प्राथमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय ऐठपुर विकासखंड पलिया कला जहां पर 2:20 बजे ही स्कूल से बच्चों की छुट्टी कर दी गई थी। वहीं जब इस संबंध में प्रधानाध्यापक से बात करने का प्रयास किया तो उन्होंने अभद्रता पूर्वक हमारे संवाददाता से बात करने से इंकार कर दिया।
जिसके बाद हमारे संवाददाता को कहा कि आपको जो लिखना है, जो करना है कर दीजिए हम कोई बात नहीं करेंगे और ना ही कोई जवाब देंगे, दसों पत्रकार रोज आते हैं। वहीं इस संबंध में जब खंड शिक्षा अधिकारी ओंकार सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मैं रास्ते में हूं और अगर शिक्षक ऐसा व्यवहार कर रहा है तो गलत है। वहीं विद्यालय से ही 2:00 बज कर 25 मिनट पर हमारे संवाददाता ने जिला शिक्षा अधिकारी बुद्धप्रिय सिंह को इस मामले की जानकारी दी तो उन्होंने संज्ञान लेते हुए तुरंत से दिखाने का आश्वासन दिया।
आपको बता दें यही सारी दिक्कत है क्षेत्र के हर विद्यालय में कहीं ना कहीं अव्यवस्था व्याप्त है। कहीं शौचालय तो कहीं अध्यापकों का सही समय पर ना पहुंच पाना, सरकार के द्वारा शिक्षा के स्तर को सुधारने की राह में रोड़ा अटका रहा है। अब देखा जाना यह है कि अधिकारी व प्रशासन ऐसे विद्यालयों के अध्यापकों पर क्या कार्यवाही करते हैं?
