प्रतियोगिता से मनुष्य स्वयं का मूल्यांकन करता है: ज़ियाउल हक | New India Times

हाशिम अंसारी, सीतापुर (यूपी), NIT:

प्रतियोगिता से मनुष्य स्वयं का मूल्यांकन करता है: ज़ियाउल हक | New India Times

तंबौर के राममनोहर लोहिया इण्टर कॉलेज में आयोजित तीन दिवसीय खेलकूद प्रतियोगिताओ के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया जिसमें 100, 200, 400 मीटर रेस, कब्बड्डी, क्रिकेट, वॉलीवाल, बैडमिंटन, मेहंदी आर्ट एंड क्राफ्ट, कैरम, शूटिंग, लेमन एंड स्पून रेस, कार्ड मेकिंग, फ्रॉग रेस, फैंसी ड्रेस, म्यूजिक चेयर, ऊँची कूद, लंबी कूद आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया गया।

वरिष्ठ शिक्षक विशाल रस्तोगी ने कहा कि प्रतियोगिता का अर्थ है आगे बढ़ने की होड़। प्रतियोगिता के वास्तव में दो रूप होते हैं – स्वयं आगे बढ़ने और दूसरों को पीछे हटाना। स्वयं आगे बढ़ना प्रतियोगिता का रचनात्मक और कल्याणकारी स्वरुप है, जबकि दूसरों को पीछे हटाना प्रतियोगिता का विनाशकारी स्वरुप है। दूसरों से आगे बढ़ने और बेहतर बनने की इच्छा ही मनुष्य को उन्नति के लिए प्रेरित करती है और उससे परिश्रम करवाती है।प्रबंधक मुन्ना मुज़म्मिल ने कहा कि प्रतियोगिता से मिली चुनौती से हमें अपने आपको दूसरों की तुलना में सुधारना पड़ता है और उनसे आगे निकलने के लिए भरपूर प्रयास करने पड़ते हैं। युवा समाजसेवी मोहम्मद ज़ियाउल हक ने कहा कि प्रतियोगिता से एक लाभ तो यह है की इससे मनुष्य स्वयं का मूल्यांकन करता है और अपनी नयी खूबियों को पहचानता है। दूसरा लाभ यह है की जब वह अन्य लोगों की तुलना में कुछ नही कर पाता है तो उसका व्यर्थ का घमंड टूटता है। उसे पता चल जाता है की संसार में उससे भी अधिक प्रतिभाशाली लोग हैं। वह उनका सम्मान करना सीखता है। इस दौरान विजेेता प्रतिभागियों को जनीर बेग, शाह आलमखान, हबीब सुल्तान, मो0 ज़ियाउल हक, फ़िरोज़ खान, कुल्लन खान द्वारा मेंंडल पहनाकर स्वागत किया गया। इस अवसर पर मोमिन, साबिर अली, रेहान खान , रिज़वान हयात , मुतिबर्रेह्मान समेत कॉलेज के प्रधानाचार्य नवीन त्रिपाठी , अकरम खान , तौक़ीर खान, अकलीम खान , अजय सिंह , विकास श्रीवास्तव , प्रतीक भटनागर आदि मौजूद रहे।

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