वी.के.त्रिवेदी, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:
पिछले कुछ समय से लगातार अफवाहों की बाढ़ आई हुई है क्योंकि कुछ लोग पत्रकारों की एकता भंग करने का काम कर रहे हैं और लगातार अफवाह उड़ा रहे हैं कि न्यूज़ पोर्टल फर्जी हैं, लेकिन सबसे बड़ी विडंबना देखिए कि यह खबर हिंदुस्तान के सबसे बड़े अखबारों जैसे दैनिक जागरण, अमर उजाला ,हिंदुस्तान, राष्ट्रीय सहारा, दैनिक भास्कर, नवभारत टाइम्स, द हिंदू एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आज तक,एबीपी, न्यूज़ 24 इत्यादि किसी में भी प्रकाशित नहीं हुई। जो लोग सोशल मीडिया का विरोध कर रहे हैं वही लोग खुद सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं जबकि इन लोगों के पास पेपर है परंतु पेपर में प्रकाशित न कर पाना इनकी ही नाकामयाबी दिखाता है। कुछ लोग अपने आप को न्यूज़ एजेंसी के पत्रकार कहते हैं परंतु न्यूज़ एजेंसी अपने आप में क्या है, पोर्टल ही तो है? सोशल मीडिया पर लिखने वाले लोग कभी भी यह चाहत नहीं रखते हैं कि उनको पत्रकार कहा जाए परंतु कलमकार कहने से कोई रोक नहीं सकता है क्योंकि उनके अंदर कोई चाहत नहीं होती है, उनके अंदर केवल एक जुनून होता है कि सच्चाई को कैसे दिखाया जाए? जब से सोशल मीडिया का उदय हुआ है तब से लगातार कुछ लोगों को दिक्कत हो रही है जबकि जनता को लगातार मदद मिल रही है। हिंदुस्तान के बड़े से बड़े अखबार लिखने में परहेज नहीं कर रहे हैं और कह रहे हैं ऐसा कार्य सोशल मीडिया के कारण हो पाया। आज के दौर में सोशल मीडिया का वजूद बहुत ही आगे है जिसके कारण लगभग सभी लीडिंग अखबारों ने अपना पोर्टल बनाया और उसके माध्यम से लगातार तुरंत घटनाओं को दिखाते हैं अतः कोई भी पोर्टल फर्जी नहीं है क्योंकि पोर्टल प्रतिमाह जीएसटी अदा करते हैं। जीएसटी भारत सरकार की देन है न कि किसी प्राइवेट कंपनी की। जीएसटी पे करने वाला या फिर सरकारी कर्मचारी जो इनकम टैक्स पे करते हैं उनको फर्जी कौन बता सकता है?

