अशफाक कायमखानी, जयपुर (राजस्थान), NIT;
राजस्थान सरकार की सितम्बर-16 में बेतहाशा बिजली दर में वृद्धि करने के सहित अनेक किसानों की मांग को लेकर सबसे पहले वामपंथियों ने दो फरवरी को सीकर की कृषि उपज मंडी प्रांगण में विशाल सभा करके सरकार की चुल्हे हिला कर रख देने के बाद सीकर कांग्रेस की प्रतिष्ठा किसानों में ढलाव की तरफ खिसकने लगी तो कुछ कांग्रेसी नेताओं को लगा कि इस मुद्दे को लेकर वो माकपा के मुकाबले पिछड़ने लगे हैं। इस पिछड़ने के नुक्सान से बचने के लिये आनन फानन में पहले तो जिले के सभी दिग्गज कांग्रेसी नेता एक साथ उर्जा राज्यमंत्री पुस्पेन्द्र सिंह राणावत से सीकर सर्किट हाऊस में ज्ञापन के बहाने मिलते हैं और फिर 22 फरवरी को माकपा के 2 फरवरी को आयोजित करने वाली जगह कृषि उपजमंडी प्रांगण में ही उसी जगह इसी मुद्दे पर किसान आक्रोश रैली करने का ऐलान कर डालते हैं।
सीकर कांग्रेस के सम्मेलन होने के पहले ही सरकार ने बढी हुई बिजली दरें वापस लेने का ऐहलान क्या किया कि कांग्रेस नेताओं ने तो अपनी 22 फरवरी को आहुत की गई सभा को रद्द करते हुये विधान सभा सत्र के बाद सभा करने का ऐहलान करके शायद त़ुरंत गले की आफत निकाल फेंकी। लेकिन माकपा ने सरकारी स्तर पर बढी बिजली दरे वापिस लेने के बावजूद दो मार्च के जयपुर प्रदर्शन करने का फिर से ऐलान करके कांग्रेस से एक बार फिर से इश्यू बेस पॉलिटिक्स करने मे एक कदम आगे निकल गई है।
कुल मिलाकर यह है कि जिले के कांग्रेस नेताओं को संघर्ष में काफी कमजोर माना जाता है। लेकिन पहली दफा बडी सभा करने का ऐलान जो कांग्रेस ने किया था उसे अब रद्द करने से जनता में उनकी छवि को अघात ही लगेगा। वहीं माकपा ने अपने पूर्व घोषित दो मार्च को जयपुर कूच को हर हालात में करने का ऐलान करके कांग्रेस को चारो खाने चित खर दिया है।
